Kargil Vijay Diwas

Kargil Vijay Diwas: कारगिल विजय दिवस:भारत के वीरों की गाथा

26जुलाई को देश कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ मना रहा है। यह दिन भारतीय सेना के अद्वितीय पराक्रम और बलिदान की याद दिलाता है। 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच लड़े गए कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने आॅपरेशन विजय के तहत दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। यह संघर्ष लगभग 60 दिनों तक चला और अंतत: 26 जुलाई को भारत ने ऐतिहासिक विजय प्राप्त की।

इस विजय के लिए भारत को भारी कीमत चुकानी पड़ी। 527 से अधिक सैनिक शहीद हुए और सैकड़ों घायल हुए। लगभग 453 नागरिकों की भी जान गई। लेकिन इन बलिदानों ने देश की सीमाओं की रक्षा की और भारत की संप्रभुता को अक्षुण बनाए रखा।

कारगिल युद्ध, 1971 के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पहली बार प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष था। यह युद्ध भारतीय सीमा में पाकिस्तानी सेना और आतंकियों की गुप्त घुसपैठ से शुरू हुआ। युद्ध अत्यंत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लड़ा गया, जहाँ कुछ चौकियाँ 18 हज़ार फीट से अधिक ऊंचाई पर थीं। इन परिस्थितियों में भी भारतीय सेना के वीरों ने अद्भुत साहस दिखाया। 3 मई 1999 को स्थानीय चरवाहों द्वारा पाकिस्तानी घुसपैठ की सूचना मिली।

इसके कुछ ही दिनों बाद 5 मई को पाक सैनिकों ने भारतीय जवानों पर हमला किया। इसके बाद 10 मई को आॅपरेशन विजय की शुरूआत हुई और 26 मई को भारतीय वायुसेना ने हवाई हमला कर युद्ध का विस्तार किया। 27 मई को एक मिग-27 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और एक पायलट युद्धबंदी बना लिया गया।

Also Read:  Save Human Life: दुर्गम पहाड़ों पर इंसानी जीवन को बचाने की जद्दोजहद

भारतीय सेना ने रणनीतिक चोटियों जैसे टोलोलिंग, टाइगर हिल, और प्वाइंट 4875 को फिर से अपने नियंत्रण में लिया। 20 जून को टाइगर हिल के आसपास के प्वाइंट 5060 और 5100 पर कब्जा कर भारतीय सेना ने युद्ध की दिशा बदल दी। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान पर सैनिकों को हटाने का दबाव बनाया और 11 जुलाई को पाक सेना पीछे हटने लगी। 26 जुलाई को भारत ने आॅपरेशन विजय की पूर्ण सफलता की घोषणा की।

इस युद्ध में कई सैनिक राष्ट्रीय नायक के रूप में उभरे। कैप्टन विक्रम बत्रा की ‘ये दिल मांगे मोर’ वाली गर्जना आज भी युवाओं में जोश भर देती है। ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव, लेफ्टिनेंट मनोज पांडे, लेफ्टिनेंट बलवान सिंह और कैप्टन एन. केंगुरुसे जैसे बहादुरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा की। इनमें से कई को परमवीर चक्र और महावीर चक्र जैसे सर्वोच्च सैन्य सम्मान मरणोपरांत प्रदान किए गए।

कारगिल विजय दिवस सिर्फ एक सैन्य जीत का उत्सव नहीं है, यह उस अद्वितीय साहस और निष्ठा की याद है, जो हर भारतीय सैनिक अपने कर्तव्य के लिए लेकर चलता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी स्वतंत्रता, हमारी शांति और हमारी सीमाएं जिन कंधों पर टिकी हैं, उन्हें हमारा सच्चा नमन मिलना चाहिए।

आज जब हम स्वतंत्रता का आनंद ले रहे हैं, हमें इन वीरों के बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए। हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय एकता के इन संदेशों को आगे बढ़ाए। कारगिल विजय दिवस हमें यही प्रेरणा देता है कि भारत का प्रत्येक नागरिक एक सच्चा सिपाही बनकर देश के लिए समर्पित रहे।
-योगेश कुमार गोयल

Also Read:  रूह-ए-सरताज अज आए धरत ते

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here