Sleep: अच्छी नींद नहीं आती, तो आजमाएं ये उपाय
यदि आपको रात में जल्दी नींद नहीं आती, बीच में नींद खुल जाती है या सुबह बहुत जल्दी उठ जाते हैं और फिर सो नहीं पाते, तो यह एक गंभीर संकेत हो सकता है कि आप इंसोम्निया यानि अनिद्रा के शिकार हैं।
जर्नल आॅफ क्लीनिकल स्लीप मेडिसिन की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में हर तीन में से एक व्यक्ति को नींद संबंधी समस्याएं होती हैं, जबकि 10 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनमें अनिद्रा के लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं। भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है- हर चार में से एक व्यक्ति अनिद्रा से ग्रस्त है।
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अनिद्रा के कारण:
- लगातार सोचने से कोर्टिसोल हॉर्मोन बढ़ता है जो नींद को प्रभावित करता है।
- मोबाइल, लैपटॉप या टीवी से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटॉनिन हॉर्मोन को दबा देती है।
- कॉफी, चाय, सिगरेट से नर्वस सिस्टम उत्तेजित होता है।
- कभी जल्दी, कभी देर से सोना स्लीप साइकल बिगाड़ देता है।
- मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं नींद की गुणवत्ता पर असर डालती हैं।
- भारी और तैलीय भोजन से पाचन खराब होता है और नींद में बाधा आती है।
- रात में भारी वर्कआउट करने से शरीर अलर्ट मोड में चला जाता है।
ये बदलाव जरूरी
कुछ आसान आदतें अगर नियमित दिनचर्या में शामिल की जाएं, तो अच्छी नींद संभव है।
तो आइए जानते हैं ऐसे ही असरदार उपाय:
सांसों पर ध्यान केंद्रित और मेडिटेशन:
रात को अगर दिमाग बहुत सक्रिय हो जाए या विचारों की भीड़ लगी हो, तो गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं। इससे मानसिक तनाव कम होता है और दिमाग शांत होता है। इसके लिए धीरे-धीरे नाक से 5 सेकंड तक सांस लें, फिर 5 सेकंड तक रोकें और मेडिटेशन करते रहें। इस प्रक्रिया को कम से कम 10 बार दोहराएं।
शांत माहौल:
एक शांत और सुकूनभरा वातावरण नींद को बढ़ावा देता है। सोने से पहले मोबाइल और टीवी बंद कर दें। कमरे की रोशनी हल्की रखें और बाहर की आवाजों से बचने के लिए इयरप्लग्स का इस्तेमाल करें। आप चाहें तो बारिश की आवाज, समुद्र की लहरें या हल्की धुनों वाला संगीत भी चला सकते हैं।
ब्लू लाइट से बचें:
मोबाइल, लैपटॉप और टीवी से निकलने वाली नीली रोशनी दिमाग को सक्रिय रखती है, जिससे मेलाटॉनिन हॉर्मोन का उत्पादन बाधित होता है। इसलिए सोने से 1-2 घंटे पहले इन उपकरणों का इस्तेमाल बंद करें। यदि जरूरी हो, तो ब्लू लाइट फिल्टर आॅन करें या ब्लू लाइट ब्लॉकर चश्मा पहनें।
किताब पढ़ें:
यदि दिमाग शांत नहीं हो रहा है तो किताब मदद कर सकती है। थ्रिलर या डरावनी कहानियों से बचें और धार्मिक ग्रंथ या प्रेरणादायक लेखों को पढ़ें। पढ़ते समय तेज रोशनी की जगह सॉफ्ट रीडिंग लाइट का इस्तेमाल करें ताकि आँखों पर जोर न पड़े।
आरामदायक बिस्तर चुनें:
आपके गद्दे, तकिए और बेडशीट का आरामदायक होना भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। शरीर की स्थिति के अनुसार गद्दा और तकिया चुनें। अगर गर्मी अधिक लगती है तो हल्की, मुलायम और सूती बेडशीट्स का इस्तेमाल करें। हल्की ठंडी हवा नींद को और बेहतर बनाती है, इसलिए जरूरत हो तो पंखा या एसी भी चला सकते हैं।
सोने का तय समय बनाएं:
हर दिन एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें, चाहे वीकेंड हो या छुट्टी। इससे आपका स्लीप साइकल संतुलित रहता है और शरीर को सही समय पर नींद आने का संकेत मिलता है।
-डॉ. गौरव इन्सां -शाह सतनाम जी स्पैशलिटी अस्पताल, सरसा

































































