Diwali: जरूरतमंदों की मद्द कर मनाएं दिवाली
दिवाली केवल दीप जलाने, मिठाइयाँ बांटने और घर सजाने का ही त्योहार नहीं है, बल्कि यह किसी के जीवन में खुशियों का उजाला भरने का अवसर भी है। जब हमारे घर रोशनी से जगमगा रहे हों, तब हमें उन परिवारों के बारे में भी सोचना चाहिए, जिनके घर आर्थिक तंगी के कारण त्योहार की खुशियों से दूर रह जाते हैं। ज़रा सोचिए, अगर हमारी छोटी-सी मद्द किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान ला दे या किसी परिवार के घर में खुशियों का दीप जला दे, तो इससे बढ़कर दिवाली का उपहार क्या होगा!
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किसी की मुस्कान बने हमारी खुशी:
इस दिवाली जरूरतमंद परिवारों को भोजन, मिठाइयाँ, कपड़े और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं देकर उनकी खुशियों में शामिल हों। बच्चों को खिलौने, किताबें और पढ़ाई की सामग्री दें, ताकि वे भी दूसरे बच्चों की तरह त्योहार का आनंद ले सकें। हमारी ओर से दिया गया एक छोटा-सा उपहार किसी के लिए बहुत बड़ी खुशी बन सकता है। सहायता करते समय उनके आत्मसम्मान का पूरा ध्यान रखें, क्योंकि सच्ची सेवा वही है, जिसमें अपनापन हो, दिखावा नहीं।
अपनों से दूर लोगों को दें साथ:
त्योहारों पर कई बुजुर्ग और अकेले रहने वाले लोग अपनों की कमी महसूस करते हैं। ऐसे में उनसे मिलने जाना, उनका हालचाल पूछना और कुछ समय उनके साथ बिताना उनके लिए अनमोल उपहार हो सकता है। अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में जाकर भी प्रेम बांटा जा सकता है। कभी-कभी किसी को महंगे तोहफों से ज्यादा जरूरत होती है एक प्यार भरे शब्द, थोड़े-से समय और अपनेपन की।
दिखावे से ऊपर उठकर करें सेवा:
फिजूलखर्ची और दिखावे से बचकर उस धन का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों की सहायता में लगाया जा सकता है। मेहनत-मजदूरी करके हमारे जीवन को सुविधाजनक बनाने वाले लोगों के प्रति आभार जताएं और जहाँ संभव हो, उनकी मद्द करें। याद रखें, किसी की मजबूरी का प्रदर्शन करना सेवा नहीं है। सहायता इस तरह करें कि सामने वाले को सम्मान और अपनापन महसूस हो।
मेहनतकश लोगों के प्रति जताएं आभार:
घर बनाने वाले मजदूरों, सफाई कर्मचारियों, घरेलू सहायकों और अन्य मेहनतकश लोगों के योगदान को न भूलें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार उन्हें मिठाई, उपयोगी उपहार या आर्थिक सहायता दें। उनके काम की सराहना करें और उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें।
जरूरतमंदों की मदद का बनाएं संकल्प:
दिवाली मनाने का एक तरीका यह भी है कि पुराने लेकिन साफ-सुथरे कपड़े, कंबल और उपयोगी घरेलू सामान जरूरतमंदों में बांट दें। यदि आप रक्तदान के योग्य हों तो जरूरतमंदों के लिए रक्तदान करें। साथ ही इस दिन पर्यावरण की रक्षा के लिए पौधे लगाने जैसे प्रयास भी कर सकते हैं।
स्थानीय कारीगरों और दीये बनाने वालों का समर्थन करें:
मॉल या बड़ी दुकानों पर सजावट का अनगिनत व आकर्षक सामान मिलता है, जो बजट के अनुसार महँगा हो सकता है। अपनी सामर्थ्य अनुसार वहाँ से खरीददारी करें, लेकिन उन्हें मत भूलें, जिनकी दिवाली सिर्फ आपकी खरीददारी पर निर्भर होती है। इसलिए सड़क किनारे दीये, मोमबत्तियां और मिट्टी के बर्तन बेचने वाले छोटे कारीगरों से खरीददारी करें, ताकि उनके घर भी रोशनी आ सके।
दिवाली की असली सुंदरता महंगे उपहारों या जगमगाती सजावट में नहीं, बल्कि उस खुशी में है, जो हम दूसरों के जीवन में ला सकते हैं। आइए, इस दिवाली एक ऐसा दीप जलाएं, जिसकी रोशनी किसी जरूरतमंद के मन तक पहुँचे। किसी उदास चेहरे पर मुस्कान लाएं, किसी बच्चे की आँखों में सपने जगाएं और किसी अकेले व्यक्ति को अपनेपन का एहसास कराएं। सच्ची दिवाली वही है, जब हमारे घर के साथ-साथ किसी और का जीवन भी खुशियों से रोशन हो।
-सुशमीता सिंह
दिवाली मनाने का सही तरीका यही है कि अपने अंदर की बुराइयों को छोड़ो, उनको आग लगाओ और जिनके घर चिराग नहीं जलते, उनके चिराग जलाओ। दिवाली के दिन आप अच्छे कपड़े पहनते हैं, खुशी मनाते हैं वो सही है लेकिन क्या आपको पता है कि इसी दिन कितने ही लोग सड़कों पर बिना कपड़ों के घूमते हैं, भूखे-प्यासे बैठे होते हैं। तो श्री राम जी वाला रास्ता यही है कि उन भूखों को खाना खिलाएं, प्यासे को पानी पिलाएं, जरूरतमंदों को कपड़े दो। कोई दु:खी, बीमार है, उनका ईलाज करवाओ। दिवाली पर अपना घर रोशन करो और जिन घरों में रोशनी नहीं है, उनको भी रोशन करो। -पूज्य गुरु संत डॉ. एमएसजी
…ताकि खुशियों से भरी हो आपकी दिवाली
दिवाली खुशियों, रोशनी और उत्साह का पर्व है। इस दिन घरों को दीपों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है, मिठाइयाँ बांटी जाती हैं और परिवार के लोग मिलकर त्योहार का आनंद लेते हैं। हालांकि, इस उत्सव के दौरान थोड़ी-सी लापरवाही भी दुर्घटना का कारण बन सकती है। पटाखों से होने वाले हादसों, आग लगने की घटनाओं और वायु प्रदूषण से बचने के लिए जरूरी है कि दिवाली मनाते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए।
दीप जलाते समय रहें सतर्क:
दिवाली पर दीपक और मोमबत्तियाँ जलाना शुभ माना जाता है लेकिन इन्हें हमेशा सुरक्षित स्थान पर रखें। दीपक पर्दों, कागज, कपड़ों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर होने चाहिए। माचिस और लाइटर बच्चों की पहुँच से दूर रखें। बिजली की सजावट करते समय अच्छी गुणवत्ता वाली लाइटों का इस्तेमाल करें और खराब तारों या खुले सॉकेट से बचें।
पटाखे चलाते समय बरतें सावधानी:
पटाखे चलाने के लिए खुले और सुरक्षित स्थान का चयन करें। उन्हें हमेशा बड़ों की निगरानी में ही जलाएं। पटाखे जलाते समय उचित दूरी बनाए रखें और सूती कपड़े पहनें। ढीले कपड़े, सिंथेटिक वस्त्र और ऐसी पोशाकों से बचें, जिनमें आग जल्दी पकड़ सकती है। पटाखों को हाथ में पकड़कर न जलाएं और न ही जलते हुए पटाखे के पास झुकें। यदि कोई पटाखा नहीं जलता, तो उसके पास तुरंत जाकर दोबारा जलाने की कोशिश न करें। पटाखों को जेब में रखने या घर के अंदर जलाने से भी बचें।
प्रदूषण से बचाव भी जरूरी:
पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा को प्रदूषित करता है और इससे बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को दिक्कत हो सकती है। तेज आवाज़ वाले पटाखे ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ाते हैं। इसलिए पर्यावरण के अनुकूल तरीके से दिवाली मनाना बेहतर है। मिट्टी के दीपक, सजावटी लाइटें, रंगोली और फूलों से घर सजाएं।
प्राथमिक उपचार की रखें व्यवस्था:
दिवाली के दौरान घर में प्राथमिक उपचार का सामान और साफ पानी उपलब्ध रखें। आग या जलने की स्थिति में प्रभावित हिस्से को तुरंत ठंडे बहते पानी के नीचे लगभग 20 मिनट तक रखें। जले हुए स्थान पर बर्फ, टूथपेस्ट या घी न लगाएं। गंभीर जलने, आँख में चोट या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। आग लगने की स्थिति में घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर पहुँचें और जरूरत पड़ने पर अग्निशमन सेवा को सूचित करें।
बच्चों और पालतू जानवरों का रखें ध्यान:
पटाखों की तेज आवाज़ से छोटे बच्चों और पालतू जानवरों में डर पैदा हो सकता है। उन्हें पटाखे जलाने वाली जगह से दूर रखें और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराएं। बच्चों को समझाएं कि पटाखों के साथ खेलना या उन्हें एक-दूसरे की ओर फैंकना खतरनाक है। बुजुर्गों और बीमार लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखें।



































































