इनवर्टर एसी और गीजर का रखें ध्यान
इनवर्टर, एसी और गीजर का रखें ध्यान
बड़े-छोटे शहरों में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का प्रयोग दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इन गैजेट्स ने हमें आराम...
फॉरेस्ट्री में करियर की अपार संभावनाएं | Immense possibilities of career in forestry
वन संसाधनों पर हमारी निर्भरता प्राचीन समय से रही है। पशुचारे और र्इंधन तक सीमित रही यह निर्भरता आधुनिक समय में और विस्तृत हुई है। भवन निर्माण, फर्नीचर और कागज उद्योग के लिए कच्चे माल की जरूरत भी वनों के दोहन से जुड़ गई है।
Funds: बच्चों की हायर स्टडी के लिए जुटाएं फंड
बच्चों की हायर स्टडी के लिए जुटाएं फंड Funds
आजकल बच्चों की पढ़ाई का खर्चा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। शुरूआती शिक्षा...
रोबोटिक इंजीनियरिंग स्पेस रिसर्च तक जाने का रास्ता
रोबोटिक इंजीनियरिंग स्पेस रिसर्च तक जाने का रास्ता
दुनिया में काम करने का तरीका लगातार बदल रहा है। कुछ वर्षों पहले तक जहां किसी कार्य...
अब आसान होगा घर का पता करना
अब आसान होगा घर का पता करना
आधुनिक युग में भारत लगभग हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है। विशेष तौर पर बैंकिंग और डिलीवरी...
दादा जी चाहते थे कि आईएएस बनूं।
बड़ी चुनौती थी कि जॉब के साथ मैं तैयारी कैसे करूं! Top UPSC
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में इस बार हरियाणा के...
नौकरी तय करेगा रिज्यूम
नौकरी तय करेगा रिज्यूम ,आपका रिज्यूम आपको बयां करता है
इसे बनाते समय किसी तरह की लापरवाही न बरतें।
पहली या नई जॉब ढूंढने के लिए...
मुद्रा योजना से युवा संवार रहे अपनी तकदीर
मुद्रा योजना के तहत बिना गारंटी के लोन मिलता है। इसके अलावा लोन के लिए कोई प्रोसेसिंग चार्ज भी नहीं लिया जाता है। मुद्रा योजना में लोन चुकाने की अवधि को 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है। लोन लेने वाले को एक मुद्रा कार्ड मिलता है, जिसकी मदद से कारोबारी जरूरत पर आने वाला खर्च किया जा सकता है। Mudra scheme
महाराष्ट्र के राज्यपाल ने किया विद्यासागर के.एम. कुंदनानी की प्रतिमा का अनावरण
आर.डी. नेशनल महाविद्यालय में हुआ समारोह
आर.डी. नेशनल महाविद्यालय (RD National College)के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में संस्थापक विद्यासागर के.एम. कुंदनानी को श्रद्धांजलि देते हुए...
अत्मविश्वास के साथ करें एग्जाम की तैयारी
आमतौर पर देखने को मिलता है कि बच्चे की परीक्षाएं आने पर ही बच्चे और अभिभावकों को पढ़ना व पढ़ाना याद आता है। परीक्षा आते ही अभिभावक बच्चे को सारा-सारा दिन पढ़ाने बैठ जाते हैं और बच्चे पर भी पढ़ाई का बहुत अधिक बोझ पड़ जाता है जिससे बच्चे परीक्षा को भूत समझने लगते हैं और उसे हौवा मानकर उसके नाम से भी चिढ़ते हैं।















































































