याद्दाश्त ठीक रखने के लिए जरूरी है मस्तिष्क का अधिकाधिक इस्तेमाल
याद्दाश्त ठीक रखने के लिए जरूरी है मस्तिष्क का अधिकाधिक इस्तेमाल
भूलना एक स्वाभाविक क्रि या है। अमेरिका के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक तथा दार्शनिक विलियम जेम्स...
‘‘जी सोचां विच रब्ब पै गया, की बणेआ ते की सी बणाया। जी घर—जात...
‘‘जी सोचां विच रब्ब पै गया, की बणेआ ते की सी बणाया।
जी घर—जात नाम भुल्लेआ, मन माया ने गुलाम बणाया।।’’ रूहानी सत्संग: पूजनीय परमपिता...
तुझे पांचवें दिन को ग्यारह बजे लेकर जाएंगे -सत्संगियों के अनुभव
तुझे पांचवें दिन को ग्यारह बजे लेकर जाएंगे -सत्संगियों के अनुभव Experiences of Satsangis - पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज का रहमो-करम
प्रेमी...
जमीं का मिलन है आसमां से करने खुदा चल आया 103वां पाक-पवित्र अवतार दिहाड़ा...
जमीं का मिलन है आसमां से करने खुदा चल आया 103वां पाक-पवित्र अवतार दिहाड़ा (25 जनवरी) विशेष
मोस्ट वैल्कम या खुदा! मोस्ट वैल्कम या खुदा!...
जिंदाराम के लीडर सज आए रूह परवर पिता |पावन महा रहमो-करम दिवस विशेष
जिंदाराम के लीडर सज आए रूह परवर पिता |पावन महा रहमो-करम दिवस विशेष
डेरा सच्चा सौदा के लिए 28 फरवरी का दिन माननीय शोहरतों से...
Millionaire: कखपति को अपनी रहमत से बनाया लखपति
कखपति को अपनी रहमत से बनाया लखपति Millionaire was made millionaire by his mercy
प्रेमी गुरसेवक सिंह इन्सां पुत्र सचखण्ड वासी हरनेक सिंह जी गली...
गर आप चाहते हैं आध्यात्मिक विकास
गर आप चाहते हैं आध्यात्मिक विकास spiritual development
जीवन में हर इंसान एक विशेष उम्र के बाद अध्यात्म से जुड़ता चला जाता है। तब उसे...
सतगुरु प्रत्येक क्षण अपने शिष्य की सम्भाल करता है
सतगुरु प्रत्येक क्षण अपने शिष्य की सम्भाल करता है
पूजनीय सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज का रहमो-करम
सत्संगियों के अनुभव
प्रेमी चरण दास पुत्र श्री गंगा सिंह...
Yaad-E-Murshid: हम आएंगे, 7 साल बाद फिर आएंगे!’ -पावन स्मृति-18 अप्रैल
Yaad-E-Murshid: हम आएंगे, 7 साल बाद फिर आएंगे!’ -पावन स्मृति-18 अप्रैल
उपरोक्त बेपरवाही वचन कि ‘हम 7 साल के बाद फिर आएंगे’ की वास्तविकता की...
चल उठ भई! तुझे तो ड्यूटी पर टाईम से पहुंचना है
पूजनीय सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज का रहमो-करम | सत्संगियों के अनुभव
मास्टर लीला कृष्ण उर्फ लीलाधर पुत्र श्री पुरुशोत्तम दास, नानक नगरी, मकान न.122, मोगा (पंजाब)। प्रेमी जी अपने पूजनीय सतगुरु परम संत शहनशाह मस्ताना जी महाराज के एक अलौकिक करिश्मे का इस प्रकार वर्णन करता है:-













































































