Experiences of Satsangis

Experiences of Satsangis वो टीलों पर भी पानी चढ़ा देता है – सत्संगियों के अनुभव: पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की दया-मेहर

प्रेमी बलदेव सिंह इन्सां पुत्र श्री हरदम सिंह, गाँव मलकाना कलां जिला श्रीगंगानगर से पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की अपने परिवार पर हुई विशेष रहमतों का इस तरह वर्णन करते हैं:-

18 मार्च 1972 की बात है। उस दिन गाँव 11 एच जिला श्री गंगानगर में पूजनीय परमपिता जी का सत्संग था। इस सत्संग में मेरा पूरा परिवार पहुँचा हुआ था। हम सभी भाइयों तथा हमारी माता जी ने सत्संग सुनकर नाम-शब्द ले लिया था परंतु हमारे परिवार के मुखिया यानि बापू जी ने नाम-शब्द नहीं लिया

और उलटा परिवार के लोगों द्वारा नाम-शब्द लेने पर बहुत नाराज़ हुए। उस समय मेरे बापूजी तथा ताया जी का खेती का काम सांझा था। वह दोनों भाई ही मनमुखी थे और शाम को इकट्ठे बैठकर रोजाना ही शराब पिया करते थे। हम सभी भाइयों ने अपने ताया जी से खेती का काम अलग कर लिया।

इससे हमारे बापू जी हमसे और ज्यादा नाराज़ हो गए। उधर ताया जी भी नाराज़ थे। बापू जी लोगों की बातों में आकर हमारे से अलग रहने लगे। लोगों के लिए तो तमाशा बन गया था। वे हर बात पर हमारा विरोध ही किया करते थे, हालांकि हमने बापू जी की बहुतेरी मिन्नतें भी की परंतु वही बात कि कोई न मानूं। एक बार तो उन्होंने हमारे विरुद्ध पंचायत बुला ली परंतु सतगुरु जी की रहमत से पंचायत ने हमारा ही पक्ष लिया। पंचायत ने कहा कि लड़कों का कोई कसूर नहीं है।

ये कोई नशा नहीं करते, कोई बुरा काम नहीं करते और खेतों में मेहनत करते हैं। ऐसे नेक बच्चे तो घर-घर में होने चाहिए। हमारे घर में ऐसे ही बुरे हालात कई सालों तक चलते रहे। इन्हीं सब कारणों से हमारे परिवार से कोई रिश्ता भी नहीं जोड़ रहा था। हम सभी भाइयों तथा हमारी माता जी का अपने मालिक, सतगुरु पूजनीय परमपिता के प्रति दृढ़ विश्वास था। हम सभी भाई मानवता की सेवा हित में डेरा सच्चा सौदा में जाते ही रहते और सतगुरु जी के हुक्मानुसार जितनी हो पाती ज्यादा से ज्यादा सेवा करते। हमें अपने सतगुरु जी पर पूर्ण विश्वास था और यही सोचते कि जो हो रहा है, ठीक ही हो रहा है और उसे हमेशा सतगुरु जी की रज़ा ही मानते।

Also Read:  कोरोना काल में डेरा सच्चा सौदा बना पर्यावरण का रक्षा कवच

एक बार मेरी माता जी द्वारा किसी परिवार से हमारे रिश्ते के संबंध में बात हुई तो वह परिवार मेरे छोटे दो भाइयों का रिश्ता करने पर सहमत थे परंतु बड़ों को नहीं। इस बारे में मेरे भाई डी.टी. 28 (जगदेव सिंह) ने पूजनीय परमपिता जी की पावन हजूरी में अर्ज़ करके सारी बात बताई। सर्व-सामर्थ सतगुरु परमपिता जी ने फरमाया, ‘तुम रिश्ता ले लो, मालिक चाहे तो टीलों पर भी पानी चढ़ा देता है।’ सतगुरु जी के वचनानुसार दोनों छोटे भाइयों के रिश्ते की बात पक्की हो गई।

हालांकि अभी शादी फाइनल नहीं हुई थी। इसी दौरान हम दोनों बड़े भाइयों को भी अलग-अलग जगह से रिश्ते आ गए। इस तरह चारों भाइयों के रिश्ते की बात पक्की हो गई, जबकि हमारे पाँचवें भाई डी.टी.28 ने पहले ही शादी करने का ख्याल छोड़ दिया था। इस प्रकार मालिक ने टीलों पर ही पानी चढ़ा दिया। इतना ही नहीं, कुछ समय बाद मेरे बापू जी ने भी नाम-दान ले लिया और परिवार के साथ मिलजुल कर रहने लगे।

मुँह में उँगलियाँ पड़ जाएँगी:

उन्हीं दिनों एक सत्संग के दौरान पूजनीय परमपिता जी सत्संग के बाद सेवादारों को प्रशाद व अपने पावन वचनों से खुशियाँ बख्श रहे थे। पूजनीय पिता जी ने हमारे परिवार का उदाहरण देते हुए फरमाया, ‘कहाँ एक का रिश्ता नहीं होता था, कहाँ चारों का हो गया। लोगों के मुँह में उँगलियां पड़ जाएँगी।’ 12 जून 1981 को डेरा सच्चा सौदा सांझा धाम मलोट दरबार में पूजनीय परमपिता जी का सत्संग था।

उस सत्संग पर पूजनीय परमपिता जी की पावन हजूरी मेें हम चारों भाइयों की दिलजोड़ माला पहनाकर एक साथ ही शादी सम्पन्न हुई। उस समय परमपिता जी बहुत ही खुश हुए और फरमाया, ‘एक ही परिवार के चार विवाह ना कभी इक्ट्ठे हुए, ना होंगे।’ उस दिन हम लोग बस लेकर मलोट दरबार आए हुए थे और जब वापिस अपने गाँव में गए तो हम चारों भाइयों की डोली (वधुएं) भी साथ थीं। जब हमें बस से उतारा गया तो गाँव के लोगों के मुँह में उँगलियां पड़ गई।

Also Read:  अब किसी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं रहेगी -सत्संगियों के अनुभव

ये तो स्वयं सतगुरु जी का ही वचन था। लोग देख रहे थे कि कहाँ तो एक का भी रिश्ता नहीं हो रहा था और कहाँ चारों भाई इक्ट्ठे बहुएं लेकर आ गए हैं। यह सब पूजनीय परमपिता जी की रहमत से ही संभव हुआ।

पूजनीय परमपिता जी ने इस प्रकार और भी बहुत परोपकार बख्शे हैं और ज्यों के त्यों बकायदा अब भी सतगुरु जी अपनी रहमतें बख्श रहे हैं। हम तो अपने प्यारे सतगुरु जी को बस धन्य-धन्य ही कह सकते हैं और हमेशा धन्य-धन्य ही कहते रहेंगे।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here