Editorial: भक्ति मार्ग में देश प्रेम की अनोखी ललक -सम्पादकीय
अपने देश के प्रति जो मर मिटने का जज्बा रखता है वही देश प्रेमी है। उसके लिए देश की आन-बान-शान सर्वोपरि होती है। जिस प्रकार एक सैनिक अपने देश के लिए जीता है, जागता है। विषम परिस्थितियों की परवाह न करते हुए वह देश की रखवाली करता है और देश के लिए अपनी जाँ निसार कर देता है।
ऐसा उच्च कोटि का देश प्रेम हर देशवासी अपने मन में रखे। हर नागरिक, देशवासी से यही आपेक्षा की जाती है और फिर ही देश की संप्रभुता चिर स्थाई बनी रह सकती है। वर्तमान का दौर जैसे हालात ब्याँ कर रहा है ऐसे में देश प्रेम की मशाल को उज्ज्वल बनाए रखना और भी जरुरी हो गया है। देश प्रेम की भावना को बल मिले, आने वाली पीढ़ियों में इसको मजबूती मिले इसकी नितांत आवश्यकता है। यह निष्ठा का भाव, कृतज्ञता का भाव हमारे मन में सदा बहता रहे, यही भव्य कामना हर एक के मन में बसती रहे।
हमारे पूर्वजों ने राष्टÑ प्रेम का जो बीज बोया उसे हमारे वीर सपूतों ने, क्रांतिकारियों ने अपने खून से सींचा है। ये उन्हीं का पराक्रम था कि देश को आजाद करवाया। देश प्रेम के बल पर ही उन्होंने गुलामी की जंजीरों को तोड़ डाला और अपनी हुकूमत कायम की। अपनी सरजमीं को अपने हाथों संवारा, सजाया और दुनिया में अपना लोहा मनवाया। ऐसा तभी संभव है जब मन में देश प्रेम की अलख जाग उठे। आज हम आजादी का जो पर्व मना रहे हैं यह देश प्रेम की अविरल धारा ही तो है जिसने हर मन में खूब रंग जमा रखे हैं। पूरा देश इसके रंग में रंगा हुआ है। हवा में, फिज़ा में देश प्रेम के तराने हैं, गाने हैं। हर घर में देश प्रेम की गंगा बह रही है। हर मन में इसकी लौ चमक रही है।
वहीं जब एक संत देश प्रेम की इस लौ को अपने भाव प्रदान कर देता है तो इसका जलवा सिर चढ़कर बोलता है। डेरा सच्चा सौदा में इस नजारे की झलक हर किसी को सुकून से भर देती है क्योंकि पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने देश प्रेम की जो मिसाल प्रस्तुत की है वो अपने आप में अद्भुत है। पूज्य गुरु जी का देश प्रेम का जो जज्बा है, जोश है, देखते ही बनता है। यह पूरे देश के लिए एक नज़ीर है। अपने इस अभुतपूर्व जज्बे को पूज्य गुरु जी ने देशवासियों में, अपने करोड़ों अनुयायियों में कूट-कूट कर भरा है।
पूज्य गुरु जी का अनुसरण करते हुए आज करोड़ों देशवासी एक सूझवान नागरिक व सच्चे देशप्रेमी होने का मान हासिल कर रहे हैं। एक सच्चा देशप्रेमी अपने देश की गरिमा को आँच नहीं आने देता। वह अपने देश की सेवा में डट कर लगा रहता है। इसी प्रकार पूज्य गुरु जी देश व समाज की सेवा में डटे हुए हैं। अपने सद्वचनों से, सदकर्मों से देश की भलाई में अग्रसर हैं। पूज्य गुरु जी स्वयं भी देशहित में लगे रहते हैं और अपने अनुयायियों से भी ऐसा ही आह्वान करते हैं। उनके पावन मार्गदर्शन में ही अनुयायी देशहित में पौधे लगाते हैं। कहीं जरूरतमंदों को भोजन करवाते हैं, इलाज करवाते हैं। कहीं निराश्रितों को मकान बनाकर देते हैं। खूनदान करने में तो उनका पूरी दुनिया में कोई सानी नहीं है।
पूरा देश इस बात को भली-भांति जानता है। कहीं आगजनी की घटना हो या कोई आपदा आ जाए तो इनके अनुयायी दौड़ पड़ते हैं अपना फर्ज निभाने को। लगभग हर गाँव-शहर में ऐसे उदाहरण हर रोज़ देखे जाते हैं। कहीं भी, किसी को, कैसी भी जरुरत पड़े इनके अनुयायी वहीं तुरंत पहुँच जाते हैं। यह देश प्रेम ही तो है जो उनके सिर चढ़कर बोलता है। उनको पूज्य गुरु जी ने देश प्रेम की ऐसी भावना से रंग दिया जिसका नूरानी रंग कभी उतरने वाला नहीं है।
अपने गुरु से देश प्यार का जो पाठ उनको मिला है वो अव्वल है। पूज्य गुरु जी ने देश प्रेम के अपने फर्ज को जिस तवज्जो से निखारा है अवर्णनीय है। उनके पावन जीवन की हर पाठशाला में देश प्रेम की सम्पूर्ण प्रेरणा है। पूज्य गुरु जी बहुमुÞखी प्रतिभा के धनी हैं। चाहे हम लेखन की, संगीत की या फिल्मांकन की बात करें, पूज्य गुरु जी ने हर अंदाज़ में अपनी महान प्रतिभाओं का जादुई असर छोड़ा है।
अपनी फिल्मों के द्वारा पूज्य गुरु जी ने देश भक्ति का अद्भुत चित्रण पेश करके बच्चे-बच्चे को ललक लगा दी है। पूज्य गुरु जी के द्वारा बनाया व गाया गया गाना ‘जिएंगे मरेंगे, मर मिटेंगे देश के लिए’ तन-मन में देश प्रेम की विराट चिंगारी पैदा कर देने वाला है। सच्चे अर्थों में संत-सतगुरु से बढ़कर कोई देशप्रेमी नहीं हो सकता। क्योंकि देश के लिए वो जो कुछ कर जाते हैं, उसे कर पाना किसी और के बलबूते नहीं हो सकता। उनके जैसा कोई देश भक्त व समाज सुधारक हो ही नहीं सकता।


































































