Manoj Lakra

Manoj Lakra: नवाचार, तकनीक एवं समर्पण शिक्षा क्षेत्र में मिसाल हैं मनोज लाकड़ा

  • राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित हैं सरकारी स्कूल के शिक्षक मनोज कुमार लाकड़ा
  • निपुण हरियाणा मिशन के जिला समन्वयक के रूप में बदली हजारों छात्रों की तकदीर

एक अच्छा शिक्षक केवल यह नहीं बताता कि कहां देखना है, बल्कि वह यह भी सिखाता है कि क्या देखना है। शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखकर उसे नवाचार, तकनीक और सामाजिक सरोकार से जोड़ना समय की मांग है। शिक्षा में नवाचार और शिक्षक का समर्पण बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ शिक्षा के क्षेत्र में अपना भरपूर योगदान दे रहे हैं सरकारी स्कूल के शिक्षक मनोज लाकड़ा।

बड़े व्यक्तित्व वाले मनोज कुमार लाकड़ा का जीवन भी सादगी भरा है। सादा जीवन और उच्च विचार वाली कहावत उनके व्यक्तित्व को और ज्यादा निखारती हैं। वर्ष 2020 में हरियाणा से एकमात्र राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा सम्मानित मनोज कुमार लाकड़ा आज हरियाणा ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सरहौल गुरुग्राम में मौलिक मुख्याध्यापक के पद पर कार्यरत मनोज लाकड़ा पिछले पांच साल से डीईईओ गुरुग्राम में जिला समन्वयक के रूप में निपुण हरियाणा मिशन से भी जुड़े हैं।

26 वर्षों के शिक्षण अनुभव में उन्होंने जो काम किया है, वह सरकारी शिक्षा की तस्वीर बदलने वाला है। मनोज लाकड़ा ने स्नातक हिंदी आॅनर्स, स्नातकोत्तर हिंदी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान के साथ सेक्रेटरीयल प्रैक्टिस और कंप्यूटर आॅपरेशन में डिप्लोमा किया है। सकारात्मक सोच और जुनून के साथ वे शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियों में लगातार सक्रिय रहे हैं।

बिना बिजली का मोबाइल टीवी भी बनाया

आईसीटी में नवाचार के तहत उन्होंने बिना बिजली का मोबाइल टीवी बनाया। यह डिवाइस मोबाइल से चलती है और बिजली की जरूरत नहीं होती। इसके जरिए ग्रामीण स्कूलों की कक्षा को स्मार्ट क्लास में बदला जा सकता है। मनोज लाकड़ा ने अपने जेब खर्च से हरियाणा के करीब 1800 स्कूलों में यह टीवी मुफ्त उपलब्ध कराया।

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manoj उन्होंने इसे ओश स्टेट यूनिवर्सिटी, किर्गिस्तान में भी प्रदर्शित किया। सिर्फ 10 रुपये की लागत से वीआर डिवाइस बनाकर उन्होंने छात्रों को वर्चुअल रियलिटी से पढ़ाया। एनसीईआरटी द्वारा आयोजित 21वीं, 22वीं और 24वीं आॅल इंडिया चिल्ड्रन आईसीटी और आॅडियो-विजुअल मेला नई दिल्ली, भोपाल और केरल में उनके मोबाइल टीवी, एआर और वीआर डिवाइस को प्रदर्शित किया गया, जिससे हज़ारों बच्चों को लाभ मिला।

क्यूआर कोड से शिक्षा में लाए क्रांति

मनोज लाकड़ा ने शिक्षा में क्यूआर कोड का अभूतपूर्व प्रयोग किया। उनके छात्र हिमांशु, कक्षा 10वीं के साथ मिलकर उन्होंने एनसीईआरटी की कक्षा पहली से दसवीं तक की सभी हिंदी और अंग्रेजी पुस्तकों को पीरियोडिक टेबल आॅफ क्यूआर कोडेड पुस्तकों में बदल दिया। एक स्कैन से पूरी किताब मोबाइल पर उपलब्ध। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बजघेड़ा गुरुग्राम को उन्होंने हरियाणा का पहला क्यूआर कोडेड ट्री स्कूल बनाया। यहां हर पेड़-पौधे पर क्यूआर कोड लगा है। स्कैन करते ही उस पेड़ की पूरी जानकारी मिल जाती है। उन्होंने करीब 20 स्कूलों में भी यही मॉडल लागू किया। इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, वैज्ञानिक, नोबेल विजेता, खिलाड़ी, भारत और हरियाणा का नक्शा, नदियां आदि 24 क्यूआर कोडेड चार्ट बनाए। इन चार्टों को उन्होंने अपने खर्च पर 20 स्कूलों में लगवाया।

क्विज, संस्कृति और खेलों में उत्कृष्टता

वे चार बार स्वामी विवेकानंद क्विज प्रतियोगिता और कौन बनेगा वैदिक-स्वामी दयानंद क्विज का सफल आयोजन कर चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में छात्रों ने जिला और राज्य स्तरीय कला उत्सव, बाल रंग, लीगल लिटरेसी, रमसा विज्ञान प्रदर्शनी में संगीत, नाटक, स्किट और सांझी में कई पुरस्कार जीते। कक्षा 10वीं की छात्रा कोमल की सांझी ने लगातार चार साल प्रथम स्थान प्राप्त किया।manoj 2

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मारुति रोड सेफ्टी नाटक को द्वितीय स्थान के साथ 50,000 रुपये का पुरस्कार मिला। क्विज प्रश्न बैंक निर्माण में उनकी अहम भूमिका रही। हरियाणा शिक्षा विभाग की टीम ने कक्षा तीसरी से दसवीं तक के 12,000 वस्तुनिष्ठ प्रश्न बनाकर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड किए। यह विश्व का सबसे बड़ा प्रश्न बैंक माना जाता है। उन्होंने केबीसी की तर्ज पर क्विज सॉफ्टवेयर भी बनवाया, जिसमें लाइफलाइन और फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट का प्रयोग होता है। यह सॉफ्टवेयर अब हरियाणा के सभी जिलों में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में इस्तेमाल होता है।

पर्यावरण के लिए भी हैं सक्रिय

पर्यावरण के लिए वे लगातार सक्रिय हैं। स्काउट-गाइड और रेड क्रॉस टीम के साथ सैंकड़ों पौधे लगवाए। 2017 में वन मंत्री विपुल गोयल के साथ पलवल में दो लाख पौधे वितरित किए। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, टीकाकरण, भूकंप जागरुकता जैसे अभियानों में भी अग्रणी भूमिका निभाई। स्कॉलरशिप के लिए उन्होंने उल्लास ट्रस्ट से जुडकर कार्टरपुरी, नुना माजरा, जहांगीरपुर, छुड़ानी और गोरावड़ के सेंकड़ों बच्चों को 1000 रुपये सालाना की स्कॉलरशिप दिलवाई।

स्कूलों की सूरत बदली, समाजसेवा में अग्रणी

मनोज लाकड़ा ने सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काम किया। बजघेड़ा और मौलाहेड़ा स्कूलों में अपने खर्च से महान हिंदी साहित्यकार, वैज्ञानिक और स्वतंत्रता सेनानी गैलरी बनाई। बजघेड़ा के सरपंच श्रीनिवास को प्रेरित कर स्कूल में 1.60 करोड़ रुपए का निर्माण कार्य कराया। कमरा, टाइल, बाथरूम, स्टेज, गेट, मल्टीपर्पज हॉल बनवाने के साथ 105 फुट तिरंगा भी लगवाया।

मोबाइल ऐप से लेकर वीआर तकनीक पर किया काम

मनोज लाकड़ा की सबसे बड़ी पहचान है छात्रों के साथ मिलकर तकनीकी समाधान बनाना। उनके मार्गदर्शन में कक्षा नौवीं से दसवीं के चार छात्रों ने मिड-डे मिल हरियाणा ऐप को डेवलप और डिजाइन किया। इस ऐप को हरियाणा शिक्षा विभाग ने पूरे राज्य में लागू किया। इससे हजारों शिक्षकों का काम आसान हुआ।

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