Chew and Eat: चबाकर खाएं दिमाग की शक्ति बढ़ाएं
जिन फूड्स आइटम्स (खाद्य पदार्थों) को चबाने में ज्यादा मेहनत लगती है, वे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली (ब्रेन एक्टिविटी) को बढ़ाते हैं। न्यूरोलॉजिकल और न्यूट्रिशनल रिसर्च में यह पाया गया है। शरीर की ऊर्जा को बनाए रखने के लिए हैल्दी फूड्स खाना जरूरी है, क्योंकि खाएं गए भोजन का असरी हमारी सेहत पर पड़ता है।
इंटरनेशनल डेंटल जर्नल के अनुसार खाने को चबाने की मेहनत दिमाग को सक्रिय बनाने में भी मदद कर सकती है। वे दिमाग के उन हिस्सों को सक्रिय कर देते हैं, जो सोचने, याद रखने, नई बातें सीखने से जुड़े हैं। हालांकि इस विषय पर विस्तृत शोध बाकी है।
रिसर्च में पाया गया है कि कठोर चीजें चबाने से दिमाग का फ्रंट हिस्सा ज्यादा सक्रिय होता है, जो फोकस बढ़ाने में मदद करता है। इसके साथ ही याददाश्त से जुड़े कॉडेट न्यूक्लियस में भी गतिविधि बढ़ती है। यह प्रक्रिया न्यूरोनल एक्टिविटी को बढ़ाकर मानसिक प्रदर्शन व सोचने-समझने की क्षमता को बेहतर बना सकती है।
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दिमाग की शक्ति बढ़ाने के लिए ये खाएं:
जूस व स्मूदी की जगह कच्ची गाजर, सेब, अमरूद और खीरा जैसे फल-सब्जियाँ लें। स्नैक्स में बादाम, अखरोट और भुने चने शामिल करें। हार्वर्ड हेल्थ के मुताबिक ओमेगा-3 युक्त खाद्य, पालक, ब्रोकली जैसी हरी सब्जियां और चाय-कॉफी याददाश्त और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
गट हेल्थ में लाभकारी:
भोजन को अच्छी तरह चबाने से पाचन बेहतर होता है और शरीर ज्यादा पोषक तत्वों को ले पाता है। किसी भी खाद्य को अधिक चबाने से गैस, पेट फूलने और कब्ज जैसी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है। साथ ही आंतों के अच्छे बैक्टीरिया भी बेहतर तरीके से काम करते हैं, जिससे गट हेल्थ मजबूत रहती है।
रक्त संचार में सुधार:
जब आप कठोर खाद्य पदार्थ (जैसे नट्स, कच्ची गाजर या सेब) चबाते हैं, तो आपके जबड़े की मांसपेशियाँ ज्यादा काम करती हैं। इससे मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह तेज हो जाता है, जिससे कोशिकाओं को अधिक आॅक्सीजन और पोषण मिलता है।
तंत्रिकाओं का सक्रिय होना:
चबाना एक जटिल न्यूरोलॉजिकल प्रक्रिया है। जब आप चबाते हैं, तो दाँतों और जबड़े के संवेदी रिसेप्टर्स नसों के जरिए मस्तिष्क के उस हिस्से को संकेत भेजते हैं जो याददाश्त, ध्यान और सीखने से जुड़े होते हैं।
तनाव से राहत:
शोध में पाया गया है कि सख्त चीजों को चबाने से दिमाग में ग्लूटाथिएन का स्तर बढ़ता है, जो एक बेहतरीन एंटीआॅक्सीडेंट है और संज्ञानात्मक कार्यों को बेहतर बनाता है। -डेस्क
ज्यादा चीनी बिगाड़ सकती है मेंटल हेल्थ
आपने सुना ही होगा कि वजन बढ़ने, डायबिटीज और दिल की बीमारियों के अलावा स्वस्थ जिंदगी जीने के लिए सभी मीठा कम करने की सलाह देते हैं। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की मूड और फूड एक्सपर्ट डॉ. उमा नायडू के अनुसार, ज्यादा मीठा खाने वाले लोगों में चीनी छोड़ने पर ड्रग्स जैसे ‘विड्रॉल सिंड्रोम’ देखे जा रहे हैं।
साथ ही ज्यादा मीठा खाना जंक फूड जैसा ही है। यह मूड स्विंग, थकान, चिंता और डिप्रेशन को बढ़ावा देता है। इसलिए बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए चीनी पर कंट्रोल करना बहुत जरूरी है।
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, अधिकांश अमेरिकियों को अपने दैनिक कैलोरी का लगभग 13% चीनी से मिलता है। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश है कि दैनिक कैलोरी का केवल 5% ही चीनी से होना चाहिए।































































