बेटा! जो हो गया सो हो गया, आगे सब ठीक होगा! -सत्संगियों के अनुभव
बेटा! जो हो गया सो हो गया, आगे सब ठीक होगा! -सत्संगियों के अनुभव
पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने की दया-मेहर
बहन निर्मल...
सतगुरु की रहमत से बच्चे की आंख हुई ठीक -सत्संगियों के अनुभव
पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का रहमो-करम
प्रेमी जगजीत सिंह पुत्र सचखंडवासी हीरा सिंह गांव जंडवाला मीरा सांगला जिला...
मृत्यु जैसा भयानक कर्म काट दिया – सत्संगियों के अनुभव
मृत्यु जैसा भयानक कर्म काट दिया - सत्संगियों के अनुभव
बहन गुरचरण कौर इन्सां पत्नी श्री मक्खन सिंह निवासी 73 ट्रू सोल काम्लैक्स गांव शाह...
सतगुरु जी ने अपने शिष्य की लाज रखी – सत्संगियों के अनुभव
सतगुरु जी ने अपने शिष्य की लाज रखी - सत्संगियों के अनुभव
पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की अपार रहमत
प्रेमी सुखदेव सिंह फौजी...
सच्चे सार्इं जी ने जो फरमाया, सच हुआ -सत्संगियों के अनुभव
सच्चे सार्इं जी ने जो फरमाया, सच हुआ -सत्संगियों के अनुभव
पूजनीय सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज का रहमो-करम
माता सायर धर्म पत्नी माला राम ढाणी...
जो मांगा वही देता गया मेरा सार्इं
सत्संगियों के अनुभव : पूजनीय सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज का रहमो-करम - जो मांगा वही देता गया मेरा सार्इं
प्रेमी हरीचंद पंज कल्याणा सरसा शहर(हरियाणा) से पूज्य बेपरवाह मस्ताना जी महाराज की अपार दया मेहर का वर्णन इस प्रकार करता है:-
बेटा, नाम का सुमिरन करना, दिन-रात नशा नहीं उतरेगा’ -सत्संगियों के अनुभव
बेटा, नाम का सुमिरन करना, दिन-रात नशा नहीं उतरेगा’ -सत्संगियों के अनुभव - पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की दया-मेहर
प्रेमी सोहन लाल...
बेटा! असीं तैनूं आपणे हत्थां नाल सेब दिन्ने आं,वंड के खा लेओ। -सत्संगियों के...
बेटा! असीं तैनूं आपणे हत्थां नाल सेब दिन्ने आं,वंड के खा लेओ। -सत्संगियों के अनुभव
पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की दया-मेहर
प्रेमी जगराज...
बेटा! हम वो ही हैं जो बचपन में तुझे दिखे थे -सत्संगियों के अनुभव
बेटा! हम वो ही हैं जो बचपन में तुझे दिखे थे
-सत्संगियों के अनुभव
पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की अपार रहमत
सेवादार जाफर अली...
असीं तो कल ही रानियां गए थे, तुसीं सोए पड़े थे
पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपार रहमत
असीं तो कल ही रानियां गए थे, तुसीं सोए पड़े थे’...














































































