Yaad-E-Murshid: हम आएंगे, 7 साल बाद फिर आएंगे!’ -पावन स्मृति-18 अप्रैल
उपरोक्त बेपरवाही वचन कि ‘हम 7 साल के बाद फिर आएंगे’ की वास्तविकता की हकीकत तब दुनिया के सामने आई, जब 15 अगस्त 1967 (यानि वोही सात साल बाद का समय) को स्वयं पूज्य मौजूदा गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने सृष्टि पर उद्धार के लिए अवतार धारण किया और परम पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने उसी दिन सत्संग में शाही स्टेज का मुंह (विशेष तौर पर) पश्चिमी दिशा की तरफ करवाकर उक्त बेपरवाही वचनों की अपने इस रूहानी रमज के द्वारा इशारा कर दिया
कि पूजनीय बेपरवाह जी की तीसरी बॉडी ने पश्चिम दिशा की ओर (राजस्थान में) अवतार धारण कर लिया है और तब तो यानि 23 सितंबर 1990 को पूजनीय परमपिता जी ने पूज्य मौजूदा गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को अपना उत्तराधिकारी ऐलान कर कुल दुनिया के सामने डेरा सच्चा सौदा की गुरगद्दी पर बतौर तीसरे गुरु विराजमान किया। अब तो किसी के मन में बेपरवाही तीसरी बॉडी के बारे में कोई शंका रही ही नहीं थी। पूजनीय परमपिता जी ने पूज्य हजूर पिता जी को संत डॉ. एमएसजी के रूप में (कि हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे) ज़ाहिर कर दुनिया भर को उन बेपरवाही वचनों की सच्चाई बता दी कि ये (पूज्य गुुरु जी) हमारा ही रूप हैं।
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ऐसी होगी तीसरी बॉडी
तीसरी बॉडी कैसी होगी, लोगों और हमें कैसे पता चलेगा कि आपकी तीसरी बॉडी सृष्टि पर आ गई है, के जवाब में पूजनीय बेपरवाह जी ने फरमाया कि जब सूरज चढ़ता है तो सबको दिखाई पड़ता है, उसी तरह जब तीसरी बॉडी रूपी सूरज चढ़ेगा तो उसका तेज प्रकाश दुनियाभर में दिखाई पड़ेगा। तब संगत इतनी ज्यादा हो जाएगी कि मौज हाथी पर चढ़कर दर्शन देगी, लेकिन फिर भी इतनी संगत को मुश्किल से ही दर्शन हो पाएंगे। राम-नाम की रड पूरी दुनिया में ही मचेगी। तो आज कौन सा शख्स (पूरी दुनिया में ही नहीं) है जो डेरा सच्चा सौदा के बारे में नहीं जानता, यह सब पूजनीय बेपरवाह मस्ताना जी दाता रहबर के उन्हीं इलाही वचनों की वास्तविकता हम सबके सामने है।
पवित्र जीवन परिचय
पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने सन् 1891 (संवत 1948) की कार्तिक पूर्णिमा को पूज्य पिता श्री पिल्लामल जी के घर पूजनीय माता तुलसां बाई जी की पवित्र कोख से अवतार धारण किया था। आपजी मौजूदा पाकिस्तान के गाँव कोटड़ा तहसील गंधेय, रियासत कलायत-बिलोचिस्तान के रहने वाले थे। पूजनीय माता-पिता के यहाँ चार बेटियाँ ही थी। बेटे की ख्वाहिश उन्हें हर पल बैचेन रखती थी। एक बार पूज्य माता-पिता जी का मिलाप एक सच्चे फकीर से हुआ। वह फकीर कोई करनी वाला (परमपिता परमात्मा का फरिश्ता) था।
उस फकीर बाबा ने पूजनीय माता-पिता जी की सच्ची तड़प को देखते हुए कहा कि बेटा तो आपके यहाँ जन्म ले लेगा, लेकिन वह आपके काम नहीं आएगा। अगर ऐसा मंजूर है तो बोलो? पूज्य माता-पिता जी ने तुरंत अपनी सहमति दी कि हमें ऐसा मंजूर है। परमपिता परमेश्वर की दया और उस फकीर की दुआ से पूज्य माता-पिता जी को पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज के रूप में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। आपजी खत्री वंश से संबंध रखते थे। पूज्य माता-पिता जी ने आपजी का नामकरण श्री खेमामल जी के नाम से किया।

अपने सतगुरु प्यारे के प्रति आपजी की अगाध श्रद्धा, दृढ़-विश्वास, सच्ची भक्ति, सच्चे प्रेम को देखकर पूज्य हजूर बाबा जी आपजी पर बहुत प्रसन्न व मेहरबान थे। पूज्य बाबा जी ने पहले ही दिन नाम-शब्द, गुरुमंत्र के रूप में आपजी को अपनी अपार दया-मेहर प्रदान की। उन्होंने फरमाया कि हम तुझे अपनी दया-मेहर देते हैं जो तुम्हारे सारे काम करेगी। आपजी ने अपने सतगुरु-मुर्शिद के हुक्मानुसार पहले सिंध, बिलोचिस्तान, पश्चिमी पंजाब के गौजरा, लायलपुर इलाकों में जगह-जगह सत्संग करके
गुरु के यशोगान के द्वारा अनेकों नए जीवों को अपने साथ ब्यास में लाकर अपने सतगुरु बाबा सावण सिंह जी महाराज से नाम-शब्द, गुरुमंत्र दिलाकर उनकी आत्मा का उद्धार करवाया। आप जिसे भी नाम-शब्द के लिए लेकर आते, पूज्य बाबा जी उसे बिना छंटनी किए नामदान बख्श देते। पूज्य बाबा जी ने इसके उपरांत आप जी को अपनी अपार रहमतें, अथाह खुशियां, अपार बख्शिशें प्रदान करते हुए अपनी भरपूर रूहानी ताकत देकर सरसा में भेज दिया कि जा मस्ताना शाह, जा बागड़ को तार।
तुझे बागड़ का बादशाह बनाया, बागड़ तुम्हारे सुपुर्द किया। जा सरसा में कुटिया, आश्रम बना और सत्संग लगा, रूहों का उद्धार कर। तू जिसको भी नाम देगा उसकी इक लत इत्थे ते दूजी सचखंड विच होवेगी। पूज्य बाबा जी ने आप जी का सहयोग करने के लिए अपने कुछ सत्संगी सेवादारों (सरसा निवासियों) की भी डयूटी लगाई। तो इस प्रकार आपजी ने अपने सतगुरु-मुर्शिद-ए-कामिल के हुक्मानुसार बेगू रोड (शाह सतनाम जी मार्ग) पर 1948 को शाह मस्ताना जी धाम डेरा सच्चा सौदा की स्थापना की।
आपजी ने दिन-रात रूहानी सत्संग लगाकर नाम शब्द-गुरुमंत्र देकर रूहों का भवसागर से पार उतारा करने का पुण्य कार्य आरंभ किया। जैसे-जैसे समय बीतता गया, आज कुछ, कल कुछ और अगले दिन उससे भी बढ़कर लोग सच्चा सौदा में आप जी की पवित्र शरण में आने लगे और इस प्रकार आप जी की दया-मेहर रहमत का प्रचार व प्रसार दूर-दूर तक फैलने लगा। आप जी के द्वारा लगाया सच्चा सौदा रूपी राम-नाम का बीज अंकुरित होकर दिन-रात फलने-फूलने लगा, जल्द ही यह रूहानी बाग बनकर आप जी के प्यार-मुहब्बत की महक से महकने लगा।
आप जी ने सन् 1948 से 1960 तक मात्र 12 वर्षों में हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली आदि राज्यों के अनेक गांवों, शहरों कस्बों में जगह-जगह दिन-रात अपने रूहानी सत्संगों के द्वारा एक लाख से अधिक लोगों को नाम-शब्द, गुरुमंत्र देकर, उन्हें नशों आदि बुराइयों तथा पाखण्डों व कुरीतियों से मुक्त किया। ‘हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सभी हैं भाई-भाई’ का प्रैक्टिकली स्वरूप आप जी द्वारा स्थापित सर्व-धर्म संगम, डेरा सच्चा सौदा में आज भी ज्यों का त्यों देखा जा सकता है।
कोई राम कहे या कोई अल्लाह, वाहेगुरु कहे या कोई गॉड-गॉड कहे, सभी एक ही जगह पर इकट्ठे बैठकर अपने-अपने धर्म व तरीके से, उस परमपिता परमात्मा का नाम ले सकते हैं। कोई रोक-टोक नहीं, कोई धर्म-जात का अंतर नहीं किया जाता। सभी धर्मों को बराबर सत्कार, सम्मान दिया जाता है। कोई ऊंच-नीच का भेदभाव नहीं है। इस प्रकार समाज में जीवोद्धार का यह सच का कारवां दिन दोगुनी व रात चौगुनी गति से बढ़ने लगा, फलने-फूलने लगा।
इह बाग सजा के टुर चलेगा
वर्णनीय है कि ऋषि-मुनि, संत, गुरु, पीर-फकीर, बड़े-बड़े औलिया, महापुरुष जो भी संसार में आए, उन्होंने अपने-अपने समय में तत्कालीन समय व परिस्थितियों के अनुरूप उपरोक्त अनुसार समाज में रहते हुए बढ़-चढ़कर परमार्थी कार्य किए और समय-अवधि पूरी होने पर यहाँ से विदा ले गए। परम पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज अपने मुर्शिदे-कामिल सार्इं शहनशाह मस्ताना जी दाता रहबर की पावन स्मृति को समर्पित अपने भजन के एक अंतरे में भी यही फरमाते हैं:-
‘शाह मस्ताना पिता प्यारा जी,
इह बाग सजा के टुर चलेआ।
भवसागर ’च डुबदी बेड़ी नूं,
कंडे पार लंघा के टुर चलेया।’
प्रकृति के इसी विधान के अनुसार पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने भी संसार से विदाई लेने का निश्चय कर लिया। आप जी ने अपने अंतिम समय के बारे में काफी समय पहले ही इशारा कर दिया था। एक दिन महमदपुर रोही दरबार में साध-संगत में बात की कि ताकत का चोला छुड़ाएं तो तुम सिख लोग तो दाग लगाओगे (संस्कार करोगे) और तुम बिश्नोई लोग दफनाओगे (धरती में दफनाओगे)। पूजनीय बेपरवाह जी ने अपनी हजूरी में बैठे प्रेमी प्रताप सिंह, रुपा राम बिश्नोई आदि सेवादारों से पूछा, बात की।
फिर स्वयं ही फरमाया कि ‘यहां तो रौला पड़ जाएगा। यहां पर चोला नहीं छोड़ेंगे।’ इसी प्रकार रानियां दरबार में भी बात की कि ‘शो (चोला छोड़ना, जनाजा निकालना) रानियां से निकालें या दिल्ली से?’ फिर स्वयं ही फरमाया कि ‘दिल्ली से ठीक रहेगा।’
आप जी ने 28 फरवरी 1960 को, यानि अपने जाने से करीब 2 महीने पहले ही पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज को बतौर दूसरे पातशाह डेरा सच्चा सौदा की गुरगद्दी पर गद्दीनशीन किया।
आप जी ने डेरा सच्चा सौदा और साध-संगत की सेवा व संभाल की तमाम जिम्मेदारियां भी उसी दिन अपने उत्तराधिकारी पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का सौंपतेहुए साध-संगत में वचन फरमाया कि ‘ये वोही सतनाम है जिसे दुनिया जपदी-जपदी (लभदी-लभदी) मर गई। असीं अपने दाता सावण शाह सार्इं जी के हुक्म से इन्हें (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की तरफ उंगली का इशारा करके) अर्शों से लाकर तुम्हारे सामने बिठा दिया है।
जो कोई पीठ पीछे से भी दर्शन करेगा, इनका नाम उच्चारण करेगा (सतनाम कहेगा) नर्कों में, नहीं जाएगा। ये अपनी दया-मेहर से उसका पार-उतारा करेंगे।’ पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज अपने एक भजन में भी फरमाते हैं:-
दुनिया रब्ब नूं ढूंढण जाए जी,
सतनाम नूं लभ असीं लिआए जी।
इहदा भेद की दुनिया पाए जी,
खुद भेद बता के टुर चलेया।
शाह मस्ताना पिता प्यारा जी,
इह बाग सजा के टुर चलेया।
इस प्रकार सच्चे पातशाह शाह मस्ताना जी महाराज अपने सतगुरु कुल मालिक द्वारा सौंपे जीवोद्धार परोपकारी कार्यों को पूर्ण मर्यादापूर्वक पूरा करते हुए 18 अप्रैल 1960 को अपना पंच तत्व का भौतिक शरीर त्याग कर कुल मालिक की अखण्ड ज्योति में ज्योति-जोत समा गए।
मानवता की सेवा में समर्पित
पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज के इस पाक-पवित्र दिन 18 अपै्रल (पावन स्मृति) को समर्पित पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने मानवता की सेवा में डेरा सच्चा सौदा में ‘याद-ए-मुर्शिद’ नि:शुल्क पोलियो व विकलांगता निवारण कंैप का आयोजन शुरू करवाया है। पूज्य गुरु जी की प्रेरणा अनुसार डेरा सच्चा सौदा में वर्ष 2010 से हर साल 18 अप्रैल को इस परमार्थी कैंप के माध्यम से पोलियो पीड़ितों की नि:शुल्क जांच की जाती है और चयनित मरीजों के आॅप्रेशन से लेकर फिजियोथैरेपी जैसी तमाम चिकित्सा सुविधाएं मुफ्त प्रदान की जाती हैं। जरूरतमंद मरीजों को कैलीपर भी मुफ्त दिए जाते हैं।


































































