1100 बार खुद के सिर पर अपने ही हाथों से उकेर चुका है ऐसे अनूठे संदेश Unique messages Rohtash Insan
गजब का जुनून: रोहताश इन्सां पिछले 11 वर्षों से अपनाए है यह शौंक
कलानौर ब्लॉक (रोहतक) के रोहताश कुमार इन्सां ने गजब का शौंक पाला हुआ है। उनके हेयर स्टाइल में बनी आकृति देखने वाले को ही आकर्षित नहीं करती अपितु उसके पीछे की कहानी सुनने वालों के भी रोंगटे खड़े कर देती है। रोहताश इन्सां अपने इस शौंक से पर्यावरण जैसे समाज भलाई के संदेश देने का बखूबी प्रयास कर रहा है। पिछले 11 सालों में उसने ऐसे करीब 1100 संदेश लोगों तक पहुंचाकर गजब का कार्य कर दिखाया है।
दरअसल, रोहताश इन्सां के पास खुद की हैयर कटिंग करने की महारत हासिल है। इस हुनर को उसने समाज को समर्पित करते हुए पहली बार 23 जनवरी 2015 को अपने सिर के बालों को कुछ इस तरह से डिजाइन किया कि देखने वालों ने उसके संदेश को खूब सराहा। तभी से रोहताश इन्सां ने इसे अपना जुनून बना लिया और थोड़े-थोड़े अंतराल पर वह अपने सिर की हेयर कटिंग को नये-नये संदेश में ढालने लगा।
रोहताश बताते हैं कि खुद के हाथ खुद की हैयरकटिंग करना बहुत मुश्किल कार्य है, लेकिन वह इस कार्य को चुटकियों में पूरा कर लेते हैं। उसने बताया कि जब कोई संदेश तैयार करना होता है तो दो मिरर की मदद से ब्लेड के द्वारा शब्दों को सिर के बालों में उकेरते चले जाते हैं। कभी ऐसा मौका नहीं आया कि जब उसको दोबारा किसी संदेश को लिखने की जहमत उठानी पड़ी हो। हर कटिंग में दो से तीन ब्लेड का इस्तेमाल होता है।
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अपने गुरु को समर्पित यह कला
रोहताश इन्सां एक निर्धन परिवार से जुड़ाव रखता है। मेहनत-मजदूरी से परिवार का गुज़ारा चलता है। डेरा सच्चा सौदा से गहरे लगाव के चलते वह अपनी इस कला से अपने आराध्य पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को पावन अवतार दिवस के अवसर पर कई बार बधाई संदेश भी लिख चुका है। रोहताश इन्सां वस्र’्रा३ समिति में बतौर सेवादार अपनी सेवाएं भी देता है। उसका कहना है कि मेरा यह प्रयास मेरे सतगुरु डॉ.एमएसजी को समर्पित है।
समाज सेवा भी लाजवाब: सड़क किनारे मरे 364 कुत्तों को वहां से हटाकर दफना चुका है
रोहताश में जुनून के साथ-साथ समाजसेवा का जज्बा भी बेमिसाल है। उसे जब भी सड़क किनारे कोई मृत कुत्ता पड़ा मिलता है तो वह बिना किसी बदबू की परवाह किए उनको वहाँ से उठाकर दूर एरिया में मिट्टी का गड्ढा खोदकर उसमें दफना देता है ताकि बदबू के चलते राहगीरों को कोई परेशानी न हो, वहीं कुत्तों के गले-सड़े शरीर से कोई बीमारी न फैले। वह अब तक सड़क किनारे मरे 364 कुत्तों को वहाँ से हटाकर मिट्टी में दबा चुका है।
































































