Experiences of Satsangis

Experiences of Satsangis भयानक दुर्घटना में बाल-बाल बचा लिया सत्संगियों के अनुभव: पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपार रहमत

प्रेमी प्रितपाल सिंह इन्सां (रेंज अधिकारी, वन विभाग) निवासी मानसा (पंजाब) अपने पर हुई पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की रहमत का वर्णन करते हुए बताते हैं:-

24 जून 2025 की बात है। मैं किराए की कार द्वारा भटिंडा से अपने घर मानसा की तरफ आ रहा था। जब हमारी कार मानसा के नजदीक गाँव ठूठेआँ वाली की पुलिस चौकी के सामने आई तो वहाँ मानसा की तरफ से आ रही एक कार हमारी कार से सीधी टकरा गई। जैसे ही टक्कर हुई तो हमारी कार का स्टेरिंग अपने-आप ही बार्इं तरफ घूम गया। दुर्घटना के दौरान हुए जोरदार धमाके की आवाज़ सुनकर पुलिस चौकी के अधिकारी, कर्मचारी तथा सामने स्थित पैट्रोल पंप के कर्मचारी भागकर मौके पर आ पहुँचे।

कार के बार्इं तरफ घूमने से हम सकुशल बच गए। मैं कार में ड्राईवर के साथ वाली सीट पर बैठा था। एक्सीडेंट होने के बाद मैं अपने-आप कार से उतर कर ऐसे बाहर आ गया, जैसे कुछ हुआ ही न हो। मेरे शरीर पर कहीं भी खरोंच तक नहीं लगी थी। जबकि मेरे साथ बैठा ड्राईवर बेहोशी की हालत में था। उससे हिला भी नहीं जा रहा था। दो पुलिस कर्मचारियों ने काफी मशक्कत के बाद उसे कार से बाहर निकाला।

सामने वाली कार में सवार तीन लोग भी गंभीर रूप से जख्मी होने के कारण बिलख रहे थे। सभी गंभीर रूप से घायलों को पुलिसवालों ने मानसा के एक हस्पताल में भर्ती करवाया। मेरे साथ चल रहे ड्राईवर की छाती और बाजू में अंदरूनी चोटें थी, जबकि दूसरी कार में सवार लोगों की टांगें व बाजू टूट गई थी।

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उनमें से कुछ के जुबाड़े इत्यादि भी टूट गए थे। वहीं दोनों कारें भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। मैंने जान बचाने के लिए अपने सतगुरु का लाख-लाख शुक्राना किया। यकीनन कर्म तो कोई भारी ही था, जो इतना बड़ा एक्सीडेंट हुआ, पर मेरे सिर पर सतगुरु का हाथ था, तो चोट कैसे लग सकती थी।

मैं अगले दिन सुबह अपने घर में सुमिरन कर रहा था व मन ही मन सतगुरु जी का मेरी जान बचाने व हर कदम पर साथ देने के लिए धन्यवाद कर रहा था। मेरी आँखें बंद थी और साथ-साथ पूज्य हजूर पिता जी द्वारा गाया गया अरदास वाला शब्द चल रहा था। इसी दौरान मुझे एक्सीडेंट वाला सारा दृश्य दिखाई दिया। मैंने देखा कि पूज्य हजूर पिता जी कार के स्टेरिंग को खुद अपने कर-कमलों से बहुत तेजी से बाईं तरफ घुमा रहे थे।

यह सब मुझे मेरे सतगुरु पूज्य हजूर पिता जी ने दिखाया। एक्सीडेंट के दौरान भी मैंने खुद कार के स्टेरिंग को बड़ी तेजी से बाई तरफ घुमते हुए देखा था, जो अपने-आप नहीं बल्कि पूज्य पिता जी ने स्वयं अपने कर-कमलों से उसे घुमा दिया था।
इस तरह पूज्य हजूर पिता जी ने ही मुझे इस दुर्घटना में से बाल-बाल बचा लिया। मैं अपने प्यारे सतगुरु जी का हर श्वास में अरबों-खरबों बार धन्यवाद एवं शुक्राना करता हूँ।

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