Energy Drinks एनर्जी ड्रिंक्स से बचें, पिएं देशी पेय
एनर्जी: रासायनिक नहीं, तरोताज़गी के लिए सबसे उत्तम है देशी पेय पदार्थ
आधुनिक दौर में युवा अकसर खुद को मिनटों में तरोताज़ा करने के लिए एनर्जी ड्रिंक्स का प्रयोग करते हैं। वैसे भी आजकल रासायनिक एनर्जी डिंÑक्स का चलन खासा बढ़ गया है। किंतु आप यह जानकार चौंक जाएंगे कि यह एनर्जी ड्रिंक्स सेहत के लिए खतरनाक भी साबित हो सकते हैं। एक अध्ययन में दावा किया गया है कि एनर्जी ड्रिंक्स के लगातार सेवन से बेचैनी और तेज धड़कन जैसी समस्याएं बढ़ती हैं, जो लंबे समय में गंभीर मानसिक और शारीरिक परेशानियाँ पैदा कर सकती है।
वहीं दूसरी ओर देशी पेय जैसे नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ या लस्सी, ग्रीन टी, फल-सब्जियों के जूस जैसे पेय पीने से सेहत में स्थाई स्फूर्ति मिलती है, वहीं सेहत पर इनका सकारात्मक प्रभाव रहता है। तमिलनाडु के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉ. सुधीर कुमार द्वारा की गई एक रिसर्च में यह स्पष्ट हुआ है कि एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन के अलावा बहुत अधिक मात्रा में चीनी और अतिरिक्त स्टिमुलेंट्स जैसे टॉरिन, गुआराना और जिनसेंग मिलाए जाते हैं। ये तुरंत ऊर्जा तो देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे नींद की लय बिगाड़ते हैं और दिल व दिमाग पर दबाव डालते हैं।
लगातार सेवन से बेचैनी और तेज धड़कन जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं, जो लंबे समय में गंभीर मानसिक और शारीरिक परेशानियाँ पैदा कर सकती हैं। इस रिसर्च में देशभर के 226 कालेजों के छात्रों को शामिल किया गया, जिसमें 62 प्रतिशत छात्रों ने इस एनर्जी ड्रिंक का सेवन किया। रिसर्च में सामने आया कि एनर्जी ड्रिंक्स आंतों के अच्छे बैक्टीरिया यानी माइक्रोबायोम पर नकारात्मक असर डालते हैं। इनके लगातार सेवन से बैक्टीरिया की विविधता घटती है और जीन्स कम सक्रिय हो जाते हैं,
जिससे मूड प्रभावित होकर चिड़चिड़ापन, चिंता या अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। रिसर्चकर्ताओं ने विद्यार्थी जीवन में गुजर रहे युवाओं को सलाह दी है कि वे अपनी दिनचर्या को नियमित करते हुए 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लें। एनर्जी ड्रिंक्स की बजाए घर के बने पेय या फल-सब्जियों के जूस लें। वहीं ध्यान, योग, सांस की कसरत या हल्की सैर तनाव को दूर करने में मददगार साबित होती है।

































































