कैंसर से बचना है, तो धूम्रपान छोड़ें World No Tobacco Day

12 जुलाई 1999 को केरल भारत का पहला ऐसा राज्य बना, जिसने सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया। केरल उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान को विश्व के इतिहास में पहली बार अवैध, असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन घोषित किया।

साल 2007 में चंडीगढ़ भारत का पहला ऐसा शहर बना, जिसे धूम्रपान मुक्त घोषित किया गया। वर्ष 2014 में पंजाब भारत का पहला ऐसा राज्य बना, जिसने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगा दिया। अब जरूरत है बाकी राज्य भी अपने प्रदेश के लोगों का जीवन बचाने में इस तरह की भूमिका निभाएं क्योंकि कैंसर जैसी भयानक बीमारी का जनक भी धूम्रपान को अधिक माना गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा 31 मई को हर साल विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1988 में इसकी शुरूआत हुई थी। डब्ल्यूएचओ ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस-2026 के लिए ‘आकर्षण का पदार्फाश, निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला’ थीम दी है।

इसमें इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया है कि तंबाकू और निकोटीन उद्योग किस प्रकार ई-कॉमर्स जैसे तेजी से आकर्षक एवं भ्रामक उत्पादों के माध्यम से बच्चों और किशोरों को निशाना बनाना जारी रखे हुए हैं। यह बात चौंकाने वाली होनी चाहिए कि सिर्फ बीड़ी के सेवन से ही व्यक्ति के जीवन के 6 से 10 साल तक कम हो सकते हैं।tobacco affects every part of body - Sachi Shiksha Hindi

वर्ष 2016-17 में किए गए ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे इंडिया के अनुसार, भारत में करीब 26 करोड़ लोग (15 वर्ष और उससे अधिक आयु के) तंबाकू का सेवन करते हैं। यह आंकड़ा देश के सभी व्यस्कों का 29 प्रतिशत है। एक आंकड़ा यह भी चौंकाने वाला है कि भारत में हर साल 10 लाख से अधिक लोग तंबाकू के कारण मरते हैं। भारत में सिगरेट या बीड़ी की तुलना में धुआं रहित तंबाकू अधिक प्रचलित है। धूम्रपान वर्तमान में दुनिया भर में हर साल 70 लाख से अधिक मौतों का कारण बनता है, जिनमें से 8,90,000 गैर-धूम्रपान करने वाले दूसरे नंबर पर हैं।

दिल्ली-एनसीआर के किशोरों में ई-सिगरेट की भी लत

तंबाकू का सेवन कई तरीके से किया जाता है। यह सिगरेट में, बीड़ी में, सिगार में और हुक्के में भरकर तो पीया ही जाता है, साथ में तंबाकू चबाया भी जाता है। बीड़ी, सिगरेट तंबाकू के सेवन का आम तरीका है। दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों में अनेक किशोरों से बड़े पैमाने पर ई-सिगरेट जब्त किए जाने की घटनाओं के बाद भारत सरकार ने ई-सिगरेट की बिक्री और आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि चोरी-छिपे इसकी बिक्री वर्तमान में भी खूब हो रही है।

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देश में कोलकाता के लोग करते हैं सबसे अधिक धूम्रपान

अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में पता चला है कि देश में सबसे अधिक लोग धूम्रपान कोलकाता में (56.6 प्रतिशत लोग) करते हैं। वहां 82 प्रतिशत पुरुष और 23.5 प्रतिशत महिलाएं धूम्रपान करती हैं। बीड़ी पीने वालों की सबसे अधिक संख्या उत्तराखंड में है।

धूम्रपान में चीन आगे, भारत दूसरे नंबर पर

दुनिया के लगभग आधे धूम्रपान करने वाले (46 प्रतिशत) केवल तीन देशों चीन, भारत और इंडोनेशिया में रहते हैं। वर्तमान में धूम्रपान करने वालों की सबसे अधिक संख्या चीन में है। वहाँ 290 मिलियन लोग धूम्रपान करते हैं। दूसरे नंबर पर 116 मिलियन धूम्रपान करने वालों की संख्या के साथ भारत दूसरे नंबर पर है। इंडोनेशिया में 61 मिलियन लोग धूम्रपान करते हैं।

धूम्रपान का सहारा क्यों लेते हैं लोग?

आमतौर पर आसपास के माहौल में यह देखा और सुना होगा कि लोग सुबह उठकर फ्रेश होने के नाम से धूम्रपान करते हैं या फिर शौचालय में बैठकर बीड़ी-सिगरेट के कश लगाते हैं। वे किस विज्ञान से यह दावा करते हैं यह तो पता नहीं, मगर हकीकत में तो बीड़ी पेट में गैस बनाती है। डॉक्टर्स के अनुसार, बीड़ी का धुआं पेट में पाचन प्रक्रिया को बाधित करता है। निकोटीन पेट की मांसपेशियों को प्रभावित करता है, जिससे एसिडिटी, जलन और गैस का निर्माण होता है।

डेरा सच्चा सौदा में तंबाकू जनित पदार्थों की हमेशा से मनाही

पूज्य गुरु जी सत्संगों में धूम्रपान निषेध का करवाते हैं प्रण World No Tobacco Day

मानवता के उद्धार में सेवारत डेरा सच्चा सौदा हमेशा से हर तरह के नशों के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में तंबाकू जनित पदार्थों जैसे सिगरेट, बीड़ी, जर्दा, खैनी इत्यादि वस्तुओं के इस्तेमाल पर डेरा सच्चा सौदा में हमेशा मनाही रही है। यही नहीं, पूज्य गुरु संत डॉ. एमएसजी ऐसे नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले संभावित खतरों से लोगों को हमेशा से जागरूक करते आ रहे हैं।

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पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं का अनुसरण करते हुए हजारों सत्संगों में लोगों ने सत्संग दौरान ही नशीले पदार्थों को त्यागकर उनकी होली भी जलाई है। वहीं यूथ वीरांगनाओं ने तंबाकू जैसे नशीले पदार्थों के विरोध में बहुत सी रैलियाँ निकालकर लोगों को जागरूक किया है।

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि नशा करना हर धर्म में मना है। धूम्रपान, तम्बाकू का अन्य तरीके से सेवन करना, शराब व अन्य प्रकार के नशे घातक हैं, जो इन्सान को मौत की तरफ ले जाते हैंं। तम्बाकू व धूम्रपान से व्यक्ति को मुँह का कैंसर, जीभा का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर और बहुत सी अन्य जानलेवा बीमारियां होती हैं। इसलिए ऐसे नशों से बचना चाहिए। पूज्य गुरु जी के आह्वान पर यहाँ के श्रद्धालू न केवल धूम्रपान इत्यादि नशा करना छोड़ चुके हैं, बल्कि बहुत से दुकानदार भाई तो अपनी दुकानों पर ऐसे नशीले पदार्थों की बिक्री भी बंद कर चुके हैं।

तंबाकू देता है मुंह व फेफड़़ों का कैंसर: डॉ. एस.पी. भनोट

कैंसर एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. एस.पी. भनोट के मुताबिक, सिगरेट के सेवन को फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम कारण माना जाता है। विश्व में फेफड़ों के कैंसर से होने वाली 87 प्रतिशत मौतें तंबाकू के सेवन के कारण होती हैं। तंबाकू का सेवन इस जानलेवा बीमारी का सबसे बड़ा जोखिम कारक है। फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को कम करने का एक सबसे अच्छा तरीका तंबाकू छोड़ना है। मुँह के कैंसर के 90 प्रतिशत मरीज तंबाकू का सेवन करते हैं।

इनमें से बड़ी संख्या में लोग तंबाकू का सेवन धुआं रहित तरीके से करते हैं। ये लोग तंबाकू को दाँतों पर रखकर चबाते हैं। यह मुंह के कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है। इससे गले के कैंसर का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है। ऐसे कैंसर के खतरे को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप तंबाकू का सेवन शुरू ही न करें। जो करते हैं वे अभी से ही इसे छोड़कर कैंसर होने के जोखिम को कम कर सकते हैं।

धूम्रपान करने वालों को दिल के दौरे की संभावना

चिकित्सकों का कहना है कि धूम्रपान करने वालों को धूम्रपान न करने वालों की तुलना में दिल का दौरा पड़ने की संभावना दुगुनी हो जाती है। हृदय संबंधी बीमारियों कोरोनरी हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को धूम्रपान बढ़ाता है। सिगरेट में निकोटीन होता है। निकोटीन शरीर को एड्रेनालाइन उत्पन्न करने के लिए उत्तेजित करता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हृदय गति तेज हो जाती है। हृदय रोग से होने वाली पाँच में से एक मौत का कारण तंबाकू का धूम्रपान होता है। तंबाकू का सेवन धमनियों को भी प्रभावित करता है। इससे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह और आॅक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है। ऐसी स्थिति में स्ट्रोक हो सकता है। सीओपीडी के 80 प्रतिशत मामले तंबाकू धूम्रपान के कारण होते हैं।

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