Farming to Cash Crops

Farming to Cash Crops परम्परागत खेती के साथ नकदी फसलों को तरजीह देने लगा कैलाश

देश की कृषि क्षेत्र में काफी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अब किसान परंपरागत खेती के साथ-साथ नकदी फसलों को भी तरजीह देने लगे हैं। विशेष रूप से सब्जियों की खेती छोटे किसानों के लिए आर्थिक मजबूती का प्रभावी विकल्प बनकर सामने आई है। फतेहाबाद जिले के गाँव ढाणी ढाका के किसान कैलाश गुजरिया ने वर्ष 2017 में दूसरे किसान से प्रेरणा लेकर भिंडी की खेती शुरू की थी।

शुरूआत में एक एकड़ में प्रयोग किया और धीरे-धीरे अनुभव बढ़ता गया। सही प्रबंधन अपनाने पर एक एकड़ से दो से तीन लाख रुपये तक की आय प्राप्त होने लगी है। खेती कार्य में उनकी पत्नी भी बराबर की भागीदारी करती है, जिससे मजदूरी की लागत कम आती है और कार्य भी समय पर पूरा हो जाता है। कैलाश का कहना है कि वर्षभर में जुलाई-अगस्त तथा फरवरी-मार्च के दौरान अच्छी गुणवत्ता मिलने पर बाजार भाव भी संतोषजनक रहता है।

इसी गाँव के किसान सतपाल इन्सां ने भी अपने बड़े भाई की सलाह पर खेती का तरीके में बदलाव करते हुए आधे खेत में सब्जियां और शेष भूमि पर पारंपरिक फसलें उगानी शुरू कीं। इस संतुलित व्यवस्था ने जोखिम भी कम किया और आय के नए स्रोत भी बनाए। उनका कहना है कि खर्च निकालने के बाद प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख रुपए तक की आय प्राप्त हो जाती है। खेती में उनके बेटे और बेटी का सहयोग मिलने से परिवार की भागीदारी भी बढ़ी है और खेती एक सांझा व्यवसाय का रूप ले चुकी है।okra

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विशेषज्ञों का मानना है कि सब्जियों की खेती में सफलता केवल अच्छी फसल उगाने से नहीं मिलती, बल्कि गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, समय पर कीट एवं रोग नियंत्रण तथा बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन योजना भी उतनी ही आवश्यक है। यदि किसान स्थानीय मंडियों के साथ-साथ सीधे उपभोक्ताओं, सब्जी विक्रेताओं या किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से बिक्री करें तो उन्हें बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है। -मोहर सिंह

भिंडी ऐसी सब्जी है जिसकी मांग वर्ष के अधिकांश समय तक बनी रहती है। उचित किस्म, समय पर बुवाई, संतुलित पोषण और नियमित सिंचाई अपनाने पर यह फसल लगभग 45 से 55 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद लगातार कई सप्ताह तक तुड़ाई चलती रहती है, जिससे किसानों को एकमुश्त भुगतान की बजाय नियमित नकद आय मिलती रहती है। यही विशेषता छोटे किसानों के लिए इसे अधिक उपयोगी बनाती है।

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