God’s CCTV camera: ईश्वर का सीसीटीवी कैमरा bhagwan sab dekh raha hai
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड पर चौबीसों घण्टे ईश्वर की नज़र रहती है। हर समय, हर पल हम सभी उसकी दिव्य दृष्टि की जद में रहते हैं। उसकी दृष्टि इतनी पैनी है कि कोई भी जीव उससे बच नहीं सकता। इस संसार के निवासी, धरतीवासी कितने भी सीसीटीवी कैमरे लगा लें, उस मालिक का मुकाबला नहीं कर सकते। सबसे बड़ी बात यह है कि वहाँ की दिव्य दृष्टि कभी खराब नहीं होती, न ही उसके बन्द होने की कोई उम्मीद होती है और न ही किसी के नियन्त्रण में आकर कोई पक्षपात कर सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो बचने का कोई भी उपाय कारगर साबित नहीं हो सकता।
ईश्वर का सीसीटीवी कैमरा एक नैतिक और आध्यात्मिक अवधारणा है जो समझाती है कि मनुष्य के हर अच्छे या बुरे कर्म पर ईश्वर की सूक्ष्म नज़र बनी रहती है। यह सत्य है कि ईश्वर के कैमरे सदैव कार्य करते हैं। इनके दोषपूर्ण होने की कभी सम्भावना नहीं होती। ईश्वरीय कैमरों की टेक्नोलॉजी हम मनुष्यों के बनाए कैमरों से बहुत अधिक एडवांस है। हर व्यक्ति के कार्यों का हिसाब-किताब इसमें कैद हो रहा होता है। यह विचारधारा नैतिक आचरण और ईमानदारी के लिए मनुष्य को प्रेरित करती है।
हमारे छोटे-से-छोटे गुण-दोष भी उसकी पारखी नज़र से छूट नहीं सकते बल्कि उसके कैमरे में सदा के लिए कैद हो जाते हैं। फिर कितने भी यत्न क्यों न किए जाएँ, उन्हें वहाँ से डिलीट नहीं किया जा सकता। परमात्मा का कैमरा इतनी अच्छी क्वालिटी का है जो युगों-युगान्तरों तक ठीक से कार्य करता रहता है। इसमें कभी खराबी नहीं आती। इसलिए इसे सुधारने की कभी भी कोई आवश्यकता नहीं पड़ती।
कितने भी गुप्त रूप से या छिपकर क्यों न अपराध कर लिए जाएं, उस प्रभु की जद से बच पाना असम्भव है। उन कृत कर्मों के अपराध का दण्ड भोगने से किसी भी शर्त पर जीव को रत्तीभर भी कन्सेशन अथवा छुटकारा नहीं मिल सकता। वहाँ किसी की सिफारिश, उच्च पद, रुतबा, अकूत दौलत आदि सब बेमायने हो जाते हैं, वे किसी काम नहीं आते। वहाँ यदि मिलता है तो केवल कृत कर्मों के फल का भोग। चाहे वे कर्मफल सुख-समृद्धि के रूप में मिले अथवा दु:खों-परेशानियों के रूप में उन्हें भोगना ही पड़ता है।
हमारा हर एक्शन चाहे वह किसी के सामने हो या एकान्त में हो वह ईश्वर की नज़र में रहता है। यह विश्वास कि हमारे अन्तर्मन और बाहरी कर्मों का डिजिटल रिकॉर्ड कहीं न कहीं मौजूद है। यह अवधारणा ईश्वर के प्रति डर और विश्वास पैदा करती है जो इन्सान को गलत कामों से रोकती है।
वैसे तो मानव मन व आत्मा भी किसी सीसीटीवी कैमरे से कम नहीं है। इसकी नज़र में हर क्षण का ब्यौरा रहता है। यह स्वयं ही सजा देने में सक्षम है। आत्मा अच्छे कार्य करने पर प्रोत्साहित करता है। देश, धर्म, समाज और घर-परिवार के नियमों के विरुद्ध कार्य करने पर कचोटता रहता है और जब तक उसका प्रायश्चित न किया जाए तब तक चैन नहीं लेने देता। हम मनुष्य भूल जाते हैं कि हम हर समय उस मालिक की आँखों के सीसीटीवी कैमरे की रेंज में रहते हैं जहाँ से भाग जाना असम्भव है। यदि मनुष्य यह ध्यान रखे कि हम हमेशा ईश्वर की नज़र में है तो कुमार्गगामी न होकर सन्मार्ग का राही बन जाएगा। -चन्द्र प्रभा सूद
ओउम्, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम वो कण-कण, ज़र्रे-ज़र्रे में मौजूद है। वो हर समय हर किसी को देख-सुन रहा होता है। जीव जैसे कर्म करता है, उसके अनुसार ही भगवान उसे फल देता है। इन्सान अपने जीवन में अच्छे कर्म करता हुआ भगवान के नाम का सुमिरन करता है, तो आवागमन से आज़ाद हो जाता है और दोनों जहानों की खुशियों का हकदार बन जाता है। -पूज्य गुरु संत डॉ. एमएसजी

































































