Salary: अनुशासित हो खर्च तभी सैलरी से मिलेगा संतोष
नौकरीपेशा लोगों के लिए महीने का आखिरी सप्ताह हर बार नई चुनौतियों लेकर आता है, ऐसे में हौंसला यही होता है कि बस अब तो कुछ दिन की बात है सैलरी आते ही सबका हिसाब चुकता कर दूंगा। किंतु यह जद्दोजहत हर महीने यूं ही चलती रहती है। बात कम सैलरी या 60 हजार से एक लाख रुपये तक वेतन पाने वालों तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि जितनी बड़ी सैलरी उतने बड़े खर्चे।
कमोबेश हर वेतनभोगी इस दौर से गुजरता है, इसकी बड़ी वजह है अनियोजित खर्च और वित्तीय अनुशासन की कमी। आर्थिक तौर पर नासमझी आपको तनाव और चिंता में डाल सकती है। अक्सर हम बिना योजना बनाए खर्च करते हैं। छोटे-छोटे खर्च, सुविधा के नाम पर होने वाला व्यय, अनचाही खरीदारी और बचत को टालने की आदत पूरे बजट का संतुलन बिगाड़ देती है।
कुछ आसान टिप्स अपनाकर इस स्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता है।
Table of Contents
वेतन मिलते ही प्लान बनाएं
अधिकतर लोग यह तय नहीं कर पाते कि उनकी आय का कितना हिस्सा कहां खर्च होना चाहिए। हर महीने कुछ खर्च निश्चित होते हैं, जैसे- मकान का किराया, राशन, वाहन खर्च, बिजली-पानी आदि। इन जरूरी खर्चों के लिए पहले से राशि तय कर लेने से अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण आसान हो जाता है। कई लोग महीने की शुरूआत में ही पूरे खर्चे शुरु कर देते हैं। परिणाम यह निकलता है कि आखिरी दिनों में आर्थिक दबाव बढ़ने लगता है। जरूरी खर्च के बाद शेष राशि को पूरे महीने के हिसाब से अलग-अलग हिस्सों में बांटें, तो पूरे महीने का एक प्लान तैयार हो जाएगा जिससे सैलरी के रूप में आए पैसे का पूरी तरह से सदुपयोग हो सकेगा।
पहले बचत की सोचें, फिर करें खर्च
हम अक्सर यह सोचते हैं कि महीने के आखिर में जो बचेगा, उसे सेविंग एकाउंट के तौर पर जमा कर लेंगे। किंतु ऐसा हो नहीें पाता क्योंकि तब तक पैसा हाथ से निकल चुका होता है। इस विषय में बेहतर टिप्स यही है कि सैलरी आते ही उसका कुछ हिस्सा यानि 30 प्रतिशत तक राशि बचत के तौर पर अलग कर दी जाए। यही बचत आपके भविष्य में आर्थिक सुरक्षा की गारंटी बन सकती है।
खराब दौर में सहायक बन सकती है यह निधि
जीवन में उतार-चढ़ाव आना प्रकृति का सामान्य नियम है। इसलिए जीवन में आने वाली परेशानियों को लेकर भी आपके पास एक खास प्लान होना चाहिए। बीमारी या नौकरी में बदलाव जैसी परिस्थितियां कई बार ऐसा आर्थिक दवाब बढ़ा देती हैं जिसके लिए आपने कभी तैयारी ही नहीं की होती। कोरोना काल मेें इस स्थिति को अधिकतर लोगों ने महसूस भी किया होगा। ऐसे में जरूरी है कि कुछ महीने के खर्च के बराबर एक आपातकालीन कोष सुरक्षित हो, जिससे आपको मानसिक संतुष्टि भी मिलेगी और आर्थिक सुरक्षा भी।
बचत के साथ निवेश भी करें
जीवन में पैसा बचाना ही एकमात्र उद्देश्य नहीं होना चाहिए, अपितु पैसे को निवेश करने की आदत भी विकसित करनी चाहिए। समय के साथ चलना इन्सान के लिए लाजमी है। यदि पैसा को सही दिशा में निवेश किया जाए तो भविष्य में धन संचय की संभावना और बढ़ जाती है।
अनाश्यक खर्चों पर करें नियंत्रण
डिजिटल सुविधाओं के चलते आजकल आॅनलाइन पैमेंट का ट्रेंड ज्यादा देखने को मिल रहा है। इस प्रक्रिया में बैलेंस को व्यवस्थित रखना अपने आप में बड़ी चुनौती है। इसलिए घर के छोटे-छोटे खर्च के लिए संभव हो तो नकदी अपने पास रखें। हर सप्ताह एक तय नकद राशि में काम चलाने की कोशिश करें। इससे आप सोच-समझकर खर्च करेंगे। वहीं हर 15 दिन में खर्च का हिसाब अवश्य चैक करें ताकि समय रहते बजट को बिगड़ने से बचाया जा सके।
बार-बार आॅनलाइन सामान मंगाने जैसी आदतों पर नियंत्रण पाएं। जरूरी खर्च, रोजमर्रा के व्यय और बचत के लिए अलग-अलग खाते की सुविधा अगर संभव है तो अवश्य मैनेज करें जिससे बजट व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी। सुख-सुविधा की वस्तु खरीदने से पहले कुछ समय उसकी भविष्य में उपयोगिता और आने वाले खर्च पर घर के अन्य सदस्यों से चर्चा अवश्य करें। कई बार बिना उपयोगी वस्तु खरीदना भी नुकसानदायक साबित हो सकता है।
वहीं हर महीने आने वाले अतिरिक्त खर्च को भी अवश्य नोट करें। जैसे बाज़ार में बढ़ती महंगाई के चलते फल-सब्जियां खरीदना, होटल इत्यादि में खाना, यात्रा, मेडिकल खर्च या किसी के लिए बर्थडे गिफ्ट इत्यादि खरीदना आदि। कई बार यह खर्च आपके बजट से बाहर चले जाते हैं। -डेस्क


































































