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Inspirational: प्रेरणादायक: अधूरे सपने को किया पूरा

सुशीला देवी ने अपने सपने को पूरा करने के लिए 63 वर्ष की आयु में किताबें उठाई और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान से (वर्ष 2025-26) 10वीं की परीक्षा 79.6% अंक हासिल कर उतीर्ण की। उन्होंने इस उम्र में फर्स्ट डिवीजन में 10वीं परीक्षा पास की है।

आयु: 63 वर्ष। नाम: सुशीला देवी। निवासी: देवनगर, महेन्द्रगढ़ (हरि.)।

जब मन में कुछ कर लेने का ठान लिया जाए तो हो नहीं सकता कि वो हो न सके। सपने हर कोई देखता है, लेकिन उन्हें पूरा कोई-कोई करता है और जो पूरा कर लेता है, वो एक प्रेरणा बन जाता है। ऐसे ही प्रेरणा का स्त्रोत हैं 63 वर्षीय बुजुर्ग माता सुशीला देवी, जिन्होंने अपनी उम्र के इस पड़ाव पर दसवीं कक्षा फर्स्ट डिवीज़न से पास करके दूसरों के लिए उदाहरण पेश किया है।

सुशीला देवीसुशीला देवी ने अपने सपने को पूरा करने के लिए 63 वर्ष की आयु में किताबें उठाई और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान से (वर्ष 2025-26) 10वीं की परीक्षा 79.6% अंक हासिल कर उतीर्ण की। उन्होंने इस उम्र में फर्स्ट डिवीजन में 10वीं परीक्षा पास की है। वे यहीं रुकने वाली नहीं हैं, उन्हें अब 12वीं परीक्षा की तैयारी करनी है। उनकी सक्सेस स्टोरी साबित करती है कि अगर सीखने की लगन दिल में हो तो, कोई रुकावट आपको रोक नहीं सकती।

सुशीला देवी का जन्म हरियाणा के रेवाड़ी जिले के भंडगी गाँव में हुआ था। 5वीं कक्षा तक की पढ़ाई गाँव के स्कूल से ही की थी। बचपन में पढ़ाई में होशियार थीं, लेकिन दादा रामस्वरूप बोहरा के मना करने पर पढ़ाई वहीं छूट गई क्योंकि आगे की पढ़ाई के लिए गाँव से बाहर जाना पड़ता था। वर्ष 1981 में उनकी शादी किसान परिवार में बाबूलाल से हुई। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ सुशीला देवी को अखबार पढ़ने का शौक हमेशा से था। वे कई वर्षों से नियमित अखबार पढ़ती रही और यही आदत उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

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एक दिन अपनी माँ को बड़ी दिलचस्पी से अखबार पढ़ता देख बेटे विष्णु ने पूछा कि क्या वे अब भी पढ़ाई करना चाहती हैं? बेटे की बात ने बरसों पुरानी पढ़ने की चाहत को फिर जगा दिया। उन्होंने तुरंत हाँ कह दी और उनके बेटे ने हौसला बढ़ाया और 10वीं का फॉर्म भर दिया। वे घर का काम खत्म करके पढ़ाई करती थीं।

जहाँ दिक्कत आती, वहाँ बेटा-बेटी मदद करते और रोज़ाना तीन से चार घंटे एग्जाम की तैयारी करती थीं। अप्रैल-2026 में जब परीक्षा परिणाम आया, तब अंग्रेजी-89, साइंस-88, गणित-78, पेंटिंग-76, हिंदी-67 नंबरों से परीक्षा पास कर ली। सुशीला देवी की कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि समाज की बंदिशों को तोड़कर अपने अधूरे सपनों को पूरा करने और परिवार के सपोर्ट की मिसाल है। -डेस्क

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