Child Grow Smarter: पढ़कर सुनाएं तेज बनेगा आपका बच्चा
यदि आपका बच्चा अढ़ाई-तीन साल से अधिक आयु का हो चुका है और बोला हुआ समझने लगा है, तो आप उसे किताबें पढ़कर सुनाना शुरु कर दें और लगातार ऐसा करें। क्लीवलैंड क्लिनिक के डॉक्टरों के अनुसार, माता-पिता अपने बच्चों को बचपन से ही किताबें पढ़कर सुनाएं। अपने बच्चों के साथ किताबें पढ़ने से दोनों के बीच खुशियों का जुड़ाव बनता है, जिससे इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि भविष्य में बच्चों को किताबें पढ़ना अच्छा लगेगा।
इसके अलावा किताबें पढ़कर सुनाने का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी है कि बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को लाभ होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बच्चे भले ही शब्दों का मतलब न समझें, लेकिन किताबें पढ़कर सुनाने की आपकी आदत उनके दिमाग के विकास के लिए ‘सुपरफूड’ काम करेगी।
इसके अलावा वैज्ञानिकों का मानना है कि पांच से आठ वर्ष की आयु के बच्चों की पढ़ाई के दौरान उनसे बात करने से उनका मस्तिष्क बेहतर रूप से सक्रिय हो सकता है। किसी पुस्तक को सिर्फ जोर-जोर से पढ़ना ही बच्चे के ज्ञान संबंधी विकास को बेहतर करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। फंक्शनल मैग्नेटिक रिसोनेंस इमेजिंग ने उन पांच साल के बच्चों का मस्तिष्क कहीं अधिक सक्रिय पाया, जिनसे कहानी सुनाने के दौरान बातचीत की गई।
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किताबें पढ़कर सुनाने के फायदे:
माता-पिता से मजबूत रिश्ता:
बच्चे को किताबें पढ़कर सुनाने से आपका रिश्ता मजबूत होता है और इससे बच्चे को अपनापन और सुरक्षित महसूस होता है। इससे बच्चा न सिर्फ आपके करीब आता है, बल्कि प्यार और ध्यान मिलने से वह समझदार भी बनता है।
भाषा और शब्दों की समझ:
किताबें पढ़कर सुनाने से बच्चा कम उम्र में नए-नए शब्द सुनने लगता है, जो उसके दिमाग में स्टोर हो जाते हैं। बाद में बच्चे बहुत जल्दी बोलना सीखते हैं।
कल्पनाशीलता बढ़ती है:
छोटे बच्चों में स्वाभाविक रूप से बड़े सपने देखने और अपनी कल्पनाओं का उपयोग करने की क्षमता होती है। इसके साथ ही अगर पेरेंट्स अपने बच्चों को किताबें पढ़कर सुनाएंगे, तो वे अपनी कल्पनाशीलता का उपयोग करना सीखेंगे। बच्चे की कल्पनाशीलता, उसे बेहतर एकेडेमिक परफॉर्मेंस में भी मदद करते हैं।
एकाग्रता बढ़ती है:
छोटे बच्चे बहुत कम समय के लिए एकाग्रता बना सकते हैं। उन्हें लंबे समय के लिए ध्यान केंद्रित करने में मुश्किलें आती हैं। लेकिन जब आप अपने बच्चों को नियमित रूप से किताबें पढ़कर सुनाते हैं, तो इससे उनके व्यवहार में बदलाव होते हैं। वे स्वभाव से सकारात्मक हो जाते हैं और किताबों में रुचि होने की वजह से डिसीप्लीन में रहना सीख लेते हैं। इससे उनकी याद्दाश्त भी तेज होती है।
शब्दावली का ज्ञान:
बच्चे किताबें पढ़ते-सुनते समय नए शब्द सीखते हैं। बच्चे को जितने ज्यादा शब्द पता होंगे, विचारों को उतने ही बेहतर ढंग से शब्दों में ढाल पाने की क्षमता बढ़ती है। जब बच्चे कहानियों को जोर से पढ़ते हुए सुनते हैं, तो वे किताबों में इस्तेमाल होने वाली भाषा से ज्यादा परिचित हो जाते हैं।
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