Father’s Day, तुम्हीं से हंसीं है मेरी जिंदगी… ओ मेरे पापा!
‘पापा’ एक ऐसा प्यारा शब्द है जिससे बच्चे का तन-मन खुशी से झूम उठता है। क्योंकि उसे पता है ‘पापा’ है तो जमाने की सारी खुशियां हमारी हैं, हर शै अपनी है। ‘पापा’ के बिना जिंदगी अधूरी लगती है। ‘पापा’ आसमान की तरह ऊंचा है जिसका साथ बच्चों को हिफाजत देता है और वह संमदर की तरह विशाल है जिसकी लहरों से बच्चों को असीम ऊर्जा मिलती है। ‘पापा’ की इन महान शक्तियों को समर्पित होता है फादर्स-डे, जिसे हर वर्ष जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। हमारी भारतीय संस्कृति में ‘पिता’ एक शानदार व जानदार शब्द है।
बात जब ‘पिता’ की एक ‘बाप’ की आती है तो इस शख्सियत के सामने सब बौने नज़र आते हैं क्योंकि पिता ही तो है जिसकी अंगुली पकड़ कर हर कोई चलना सीखता है। ‘पिता’ ही जिंदगी संवारता है, सजाता है और हर कदम अदम्य साहस से भरा होता है। ‘पिता’ हमेशा बच्चों के लिए जीता है, कमाता है और उनके हर सपने को पूरा करता है। घर-परिवार की खुशी, बच्चों की खुशी ही उसकी पूंजी होती है। तभी तो ‘पिता’ का नाम जग में बड़ा होता है।
लेकिन जब एक पिता वाकई ऐसा हो जो अतुलनीय हो, अपार ताकतों का भंडार हो, एक मसीहा हो और दो जहानों में संभाल करने वाला हो, उसके बिना ‘फादर्स-डे’ की हम कल्पना भी नहीं कर सकते। और वो हमारा ‘पिता’ है एक महान संत, सर्वकला सम्पन्न सतगुरु संत डॉ. एमएसजी जिस पर साढ़े सात करोड़ बच्चों को गर्व है। करोड़ों बच्चों का महान ‘पिता’ है वो जिनका नाम लेकर हर बच्चे का सीना चौड़ा हो जाता है। वो सबके सिरों का ताज है।
हर एक बच्चे की जान उनमें ही बसती है क्योंकि जो कुछ उनसे मिला है वो कोई और नहीं दे सकता। वो जग में निराले ‘पिता’ हैं सबके। करोड़ों बच्चों में हर बच्चे की अपनी फरमाईश रहती है और ‘पापा’ से अपनी सौगात पाकर दिल वारे-वारे हो जाता है। पूरी दुनिया में वो एक ऐसा ‘पिता’ है जिनका मकसद ही अपने बच्चों की जिंदगी को खुशहाल बनाना है। वो बना भी रहे हैं और सिर्फ इस जहाँ की ही नहीं बल्कि अगले जहाँ की भी हर खुशी का इंतज़ाम कर दिया है उस महान ‘पिता’ ने। जब ऐसा महान ‘पिता’ मिल जाए तो उसका गुणगान जन्मों-जन्मों तक गाया जाता है।
हर बच्चा अपने प्यारे ‘पापा’ के गुणगान गाते नहीं थकता। इस फादर्स-डे पर ‘पापा’ की प्यारी बच्चियां उसके अहसानों का किस्सा सुनाते हुए भाव-विभोर हैं। अपने प्यारे ‘पापा’ के प्रति उनका प्यार उमड़ रहा है। उनकी जिंदगी का हर लम्हां ‘पापा’ को समर्पित है। प्यार भरे ये किस्से ठंडी छांव की तरह हैं जो उनको सुकून से भर देते हैं। जब हम सब बेटियाँ मिल बैठती हैं तो बस पापा की ही बात होती है। शुभदेवी खुशलीन आई थी छुट्टियों में। बस फिर क्या था।
सारी बहनों की टोली मिल बैठी और लगी अपने दु:ख-सुख सांझे करने। ‘हाँ सब ठीक है! पिताजी ने इतना अच्छा घर दिया है, वरना हमारा कौन था, इस दुनिया में, अब तो काकू भी डेढ़ साल का हो गया है। कहता है, नानू के पास जाना है। ससुराल में भी तो कई लोग जानने लगे हैं मुझे! मुझे कोई दु:ख नहीं, लेकिन अपने अतीत को सोचकर डर लगता है, अगर पिताजी मुझे ‘शुभदेवी’ ना बनाते तो मेरा अस्तित्व कब का मिट्टी में मिल गया होता।
पर अब स्वर्ग में आकर, उस नर्क भरी जिंदगी को सोच कर भी रूह कांप उठती है। अब ऐसी दुनिया मिली है जो हर किसी के नसीब में नहीं होती।’ जब खुशलीन ने कहा तो सभी पास बैठी बेटियों की आँखें भर आर्इं। तभी नन्हीं जीएफबी (गुरु फादर बेटियाँ) गुररीत कहने लगी, ‘छोड़ो पुरानी बातें! फादर-डे आ रहा है। पापा के लिए कुछ सरप्राइज प्लान करना है।’ ‘वो तो पॉसिबल नहीं है।’ जब दूसरों ने कहा तो रोआंसी हो गई।
सभी हँसने लगी ‘पापा को सरप्राईज…!’ तुम खुद ही कहती हो कि पापा को तो हमारी जरूरतों का पहले ही पता चल जाता है तो फिर उन्हें सरप्राइज कैसे दे सकते हो! खूब हँसने लगे सारे। जीएफबी स्वाति कहने लगी, ‘पिता का फर्ज़ पहले दर्जे का तो हमारे पापा ने निभाया है। दुनियावी माँ-बाप कभी हमारी इतने अच्छे घरों में, परिवारों में शादी ना करा पाते। हमारा पढ़ाई से लेकर अपने पैरों पर स्टैंड होने तक ही नहीं बल्कि अब हमारे बच्चों के साथ भी नानू पापा का पूरा फर्ज़ निभा रहे हैं।’ दिलप्रीत बोली, ‘मुझे खुद कोचिंग देकर नैशनल-इंटरनैशनल लेवल के प्लेयर भी तो पापा जी ने ही बनाया।’
तभी ‘कुल का क्राउन’ प्रियंका बोल पड़ी, ‘पापा एक सागर ही तो है, सागर! दुनिया के पापा और हमारे पापा में एक फर्क है, ये पास न होते हुए भी पास रहते हैं। मुझसे पहले मेरे दिल की जान लेते हैं।
हमारी जरूरतों को हमसे पहले जानकर पूरा कर देते हैं। मुझे तो मेरे अपार (पति का नाम) के रूप में खुशियाँ भी अपार दे दी। वो मेरे माँ-बाप के घर में बेटे की कमी को भी बखूबी पूरी करता है, साथ ही बिजनेस में भी कंधे से कंधा मिलाकर चलता है और अब तो नन्हां अपार भी आ गया हमारी खुशियों को चार चाँद लगाने। पता नहीं पापा जी का कैसे धन्यवाद करूँ।’ ‘हर दिन में हजारों बार शुक्राना करें पिताजी का तो भी कम है।
’ सुपर स्टूडैंट अवनीश बात को काटते हुए बोली। हॉस्टल में आॅईसक्रीम, चॉकलेट जैसी छोटी-छोटी इच्छाओं से लेकर बोर्ड में मैरिट लाने तक की इच्छा भी कभी पिताजी ने अधूरी नहीं छोड़ी। फिर पढ़ाई खत्म हुई तो घर आ गए और शादी हो गई। शादी के बाद काफी टाईम तक बच्चा नहीं हुआ तो सभी अपने-अपने सुझाव देते, कोई कहता यहाँ मत्था टेक आ तो कोई कहता वहाँ कुछ दान कर दे। मैं उन्हें हँसकर कहती, आज तक तो मुझे कभी अपने पिताजी से कुछ माँगने की जरूरत पड़ी नहीं।
पापा हैं ना! यही मन में सोचा था कि रात को सपने में पिताजी आए, मैंने कहा कि पिताजी बच्चा नहीं है। पिताजी कुछ सोचते हुए बोले, बेटा सुमिरन करना हो जाएगा। अगले दिन मैंने सबको बोल दिया, अब हो जाएगा। सभी पूछने लगे, क्या कोई टैस्ट करवाया है। मैंने कहा, मेरे डॉक्टर पिताजी ने कहा है, हो जाएगा तो बस फिर हो जाएगा। ना टैस्ट, ना कोई दवाई, कुछ दिनों में ही मैंने कन्सीव कर लिया। जैसा मैंने चाहा था पिताजी ने बिल्कुल वैसा ही दिया।
‘हम ऐसे बाप हैं, जो दुश्मनों के लिए अकेले ही काफी हैं।’ मूवी में पिताजी का डॉयलॉग है न! बस बिल्कुल इसी तरह पिताजी हमारी तरफ आती हर मुश्किल को अकेले ही दूर भगाते रहते हैं। सैल्यूट है ऐसे पिता को, शत्-शत् नमन है हमारे प्यारे पापा को!
यूँ तो हमने जहान सारा देखा।
पर रिश्ता जो निभाए हर कदम पर,
एमएसजी सा न कोई प्यारा देखा।खुशी में लाखों हाथ मिले पर,
गमी में कंधे पर हाथ सिर्फ तुम्हारा देखा।
एमएसजी सा न कोई प्यारा देखा।धूप गिरी जो हम पर कभी,
‘रोना नहीं बेटा’ कहने वाला।
न कोई आप सा सहारा देखा,
एमएसजी सा न कोई प्यारा देखा।बच्चे के लिए नींद वारती माँ सुनी थी कभी,
पर बच्चों के लिए अपना सर्वस्व वारता
बाप न्यारा देखा।
एमएसजी सा न कोई प्यारा देखा।
Happy father’s day to the one who is playing the role of a father in the lives of people 7.5 million



































































