Ooty हरी-भरी ठंडी वादियों वाला हिल स्टेशन ऊटी
तमिलनाडू में स्थित ऊटी एक बेहतरीन पर्यटन स्थल है, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। इस हिल स्टेशन में दूर-दूर तक फैली हसीन वादियाँ, हरे-भरे पेड़ों की हरियाली यहाँ आने वाले पर्यटकों को सुकून पहुँचाती है। यह वजह है कि इस जगह को ‘पहाड़ों की रानी’ की संज्ञा दी जाती है। ऊटी की खूबसूरती और यहाँ की खासियतों को जानने के बाद आप भी इस हिल स्टेशन पर कुछ सुकून के पल जरुर बिताना चाहेंगे। यहाँ आकर आप नीलगिरि की पहाड़ियों में घूमते हैं।
नीलगिरी की इन पहाड़ियों को ‘ब्लू माउन्टेन’ के नाम से जाना जाता है। ऊटी में स्थित तरह-तरह के पर्यटन स्थलों और विशाल चाय के बागानों, झीलों, झरनों, भव्य बगीचों को देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। ऊटी की खूबसूरती को करीब से देखने के लिए हर साल भारी संख्या में पर्यटक आते हैं। यहाँ पूरे साल मौसम सुहावना बना रहता है। इसलिए आप किसी भी मौसम में यहाँ आकर सैर कर सकते हैं।
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यदि आप ऊटी आने का विचार बनाते हैं, तो आपको इन स्थानों पर जाना चाहिए।Ooty
ऊटी झील:

बोटानिकल गार्डन, ऊटी:
ऊटी में अगर आपको अपने दिन का पूरा मजा लेना है तो शाम के समय बोटानिकल गार्डन जरूर जाएँ। ऊटी के बोटानिकल गार्डन में 3000 साल से भी ज्यादा पुराने पेड़ हैं। इस छोटी सी जगह में अद्भुत पेड़-पौधे, कैक्टस, आर्किड और ऐसे कई दूसरे पेड़ हैं जो किसी भी प्रकृति प्रेमी को लुभाएँगे। ऊटी आने वाले पर्यटक हमेशा से ही इन बगीचों में घूमने के लिए उत्साहित रहते हैं। अगर आप मई में यहाँ आ सकें तो आपको बेहद सुंदर दिखने वाली फूलों की प्रदर्शनी दिख सकती है, जो ऊटी के सबसे खास आकर्षणों में से एक है।
पाइकारा झरना:
इस जगह की खूबसूरती हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करती है। मुकुर्ती की चट्टानों से निकलता पाइकारा झरना एक गजब तरह का आकर्षण प्रस्तुत करता है और ऊपर से गिरने के बाद एक कुंड में गिरता है और पाइकारा झील में जाकर विलीन हो जाता है। इस जगह पर आकर आप झरने की सुंदरता को देखने के साथ-साथ बोटिंग का भी मज़ा ले सकते हैं।
वनस्पति झील:
अगर आप अपने परिवार के साथ सुकून भरे पल प्रकृति के बीच में बिताना चाहते हैं, तो वनस्पति उद्यान जरूर जाएं। इस उद्यान की स्थापना साल 1847 में की गई थी, जिसकी देखभाल बागवानी विभाग करता है। यहाँ आपको पेड़-पौधों की 650 से भी ज्यादा प्रजातियाँ देखने को मिलेंगी।
डोड्डाबेट्टा चोटी:
8,606 फीट की ऊंचाई पर बसा डोड्डाबेट्टा चोटी दक्षिण भारत की सबसे ऊंची जगह है। ऊटी से 10 किमी की दूरी पर मौजूद इस चोटी को देखने के लिए अधिक संख्या में पर्यटक घूमने-फिरने के लिए आते हैं। आप यहाँ से नीलगिरि के मजेदार नज़ारे देख सकते हैं। चोटी का शीर्ष मंत्रमुग्ध कर देने वाला है, यहाँ दूरबीन का घर भी है, जिसमें दो दूरबीन हैं जो घाटी के आसपास का नज़ारा पेश करते हैं।
सेंट स्टीफंस चर्च:
सेंट स्टीफंस चर्च ऊटी के सबसे पुराने चर्च के तौर पर जाना जाता है। यदि आप ऊटी घूमने के लिए आते हैं तो आपको इस चर्च में भी जाना चाहिए। इस जगह पर जाकर आप इस जगह के अतीत की कल्पना को जी (स्मरण कर) सकते हैं। इस चर्च में आपको शांति और सकून की अनुभूति होगी। इस जगह पर आपका परिचय विक्टोरियन युग की स्थापत्य शैली से होगा, जोकि अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती है।
टॉय ट्रेन की सवारी:
ऊटी एक ऐसी जगह है, जिसे रोमांच और मनोरंजन दोनों के लिए जाना जाता है। इस जगह का मौसम बहुत ही सुहावना है। ऐसे में यदि आपको यह जगह स्लो मोशन में देखने को मिल जाए तो भला इससे बड़ी बात क्या होगी। ट्रॉय ट्रेन की सवारी आपको ऐसा ही एक खूबसूरत मौका देती है। जिसकी वजह से आपकी यात्रा और भी खूबसूरत हो जाती है।
ऐसे पहुँचें ऊटी:
हवाई मार्ग:
आपको सभी बड़े शहरों से कोयंबटूर के लिए फ्लाइट मिल जाएगी। कोयंबटूर से ऊटी की दूरी सिर्फ 77 कि.मी. है।
रेल मार्ग:
ट्रेन से मेट्टुपालयम पहुँच सकते हैं जो ऊटी से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। यहाँ से ऊटी की दूरी 80 कि.मी. है।
रोड मार्ग:
ऊटी, सड़कों के जरिए सभी पास की जगहों से जुड़ा हुआ है। सरकारी और निजी बस सेवा इस छोटे से शहर से आसानी से मिल जाएँगी। वैसे ज्यादातर लोग यहाँ ड्राइव करके आना ज्यादा पसंद करते हैं, आखिर रास्ता इतना सुंदर जो है।
































































