पंजाब की शान बना यह गाँव बल्ले में बेटियों का सम्मान बल्ले-बल्ले
जीआईआई के लिंगानुपात के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत में पिछले 5 वर्षों में काफी प्रगति दर्ज हुई है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआईआई) के जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में भारत 0.490 स्कोर के साथ 191 देशों में से 122वें स्थान पर था।
लेकिन वर्ष 2025 के सूचकांक में 14 रैंक का सुधार करते हुए भारत अब 108वें स्थान पर है, जिसका जीआईआई स्कोर 0.437 है, जो लैंगिक समानता में सुधार को दर्शाता है। हालांकि कुछ राज्यों में जिलास्तर पर लिंगानुपात का ग्राफ कहीं-कहीं संतोषजनक नहीं है, किंतु देशभर के नज़रिए से भारत इस मामले में सम्मानजनक स्थिति में है।
गुरु-पीरों-फकीरों की धरती पंजाब भी बेटियों के प्रति सोच में अभी उतना बदलाव नहीं ला पाया है जितना इस जमाने में बदलाव होना जरूरी था। बेटियों को कोख में मारने का दंश आज भी यह राज्य झेल रहा है। लेकिन ऐसी स्थिति में भी बहुत से गांव ऐसे भी हैं जो बेटियों के मान-सम्मान में एक अलग पहचान बनाए हुए हैं। जिला भटिंडा के गांव बल्ले ने लिंगानुपात सुधार के लिए जो प्रयास किया है, वो समाज के लिए प्रेरणादायी है।
गाँव बल्ले की सरपंच अमरजीत कौर ने गाँव में महिलाओं को हर अवसर पर पुरुषों के समान अधिकार दिलाने का सराहनीय कार्य किया है। यहाँ की गुरबचन सिंह सेवा समिति भी इस कार्य में विशेष सहयोग कर रही है। गाँव में लोहड़ी का त्यौहार पर नवजन्मी बेटियों के साथ-साथ उनकी माताओं को भी विशेष तौर पर सम्मानित किया जाता है।
सरपंच द्वारा इस पहल को यादगार बनाने के लिए नवजन्मी लड़कियों को लोहड़ी के अवसर पर चांदी के कंगन पहना कर सम्मानित किया तो इसकी पूरे पंजाब में खूब सराहना हुई। कहते हैं कि जिस घर में माँ-बहन-बेटी की इज्जत होती है वो घर खूब तरक्की करते हैं। कुछ इसी तरह ही गाँव बल्ले की ग्राम पंचायत और गुरबचन सिंह सेवा सोसायटी ग्राम स्तर पर विकास कार्यों के साथ-साथ बेटियों के मान-सम्मान को विशेष तवज्जो दे रही हैं।
इस गांव की एक और खासियत भी है कि यहाँ नवजात बच्चियों को ही मान-सम्मान नहीं दिया जाता अपितु गाँव की सास-बहुओं को भी विशेष तौर पर सम्मानित करने के लिए नई मुहिम चलाई है। गाँव में ‘बेस्ट सास’ का अवार्ड शुरु किया है। यह अवार्ड को पाने के लिए जो सास अपनी समझदारी दिखाते हुए सास-बहु के रिश्ते को माँ-बेटी की तरह निभाती है। यह अवार्ड शुरु करने का मुख्य उद्देश्य समाज में महिलाओं के योगदान की सराहना करना तथा परिवारिक रिश्तों की सांझ को मजबूत करना है। -सुखजीत सिंह मान

































































