Editorial

गुरभक्ति से देशभक्ति को मिला बल -सम्पादकीय

पूरा देश आजादी का उत्सव मना रहा है। आजादी के तराने चहूं ओर हैं। इसकी गौरवगाथाओं के जयकारे दसों-दिशाओं में गूंज रहे हैं, क्योंकि इस आजादी की वीर गाथाएं महान हैं। जिस आजादी का आनन्द आज हम मना रहे हैं, बड़ी कुर्बानियों के बाद नसीब हुई है। कितने अरसे गुजर गए इसे पाने में। मुद्दतों का संघर्ष झेला है देशवासियों ने इसके लिए। वीरों, योद्धाओं, महापुरुषों ने प्राणों की बाजी लगाकर हमें गुलामी की जंजीरों से आजाद करवाया। वीर सपूतों ने तन-मन-धन से अपना फर्ज निभाया और भारत देश को आजाद करवाकर ही दम लिया।

हमारे लिए 15 अगस्त का ये दिन बहुत ही नसीबों वाला है। स्वतंत्रता दिवस के इस दिन को धूमधाम से मनाना हमारे लिए गर्व की बात है। इसी गर्व व फख्र के साथ हम दुनिया को बताते हैं ‘सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा’। हर देशवासी के लिए स्वतंत्रता दिवस का यह दिन आन-बान-शान का प्रतीक है। बड़े समर्पण का दिन है। नमन, अभिनन्दन का दिन है। बड़ी खुशियां लेकर आता है ये दिन। अब ये धरती अपनी है। आसमां अपना है। ये फिज़ा अपनी है। आबोहवा अपनी है। ये जहां अपना है। इसीलिए आजादी के मायने अव्वल दर्जे के होते हैं। हमारे लिए 15 अगस्त का ये मुकद्दस दिन खुशनसीब है। देशभक्ति की भावनाओं से ओत-प्रोत ये दिन जहां देशवासियों के लिए आजादी का महोत्सव लेकर आया है, वहीं डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों के लिए देशभक्ति के साथ-साथ गुरभक्ति का पवित्र पैगाम भी लाने वाला है यह शुभ दिन।

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और देशभक्ति के साथ जब गुरभक्ति का संगम हो जाए, तो बात ही न्यारी हो जाती है। क्योंकि डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. एमएसजी इसी शुभ दिहाड़े को धरा पर अवतार धार कर आए हैं। अपने मुर्शिद-ए-कामिल के पावन अवतार दिवस पर आजादी की खुशियां कई गुणा और बढ़ गई। आजादी के मायने भी निराले हो गए। जो तन की खुशी थी, मन की खुशी थी, वो रूह की खुशी बन गई। उनके लिए 15 अगस्त का ये पावन दिन रूहानी प्यार की नज़ीर बन गया। ऐसा प्यार जो इस दुनिया में कहीं नहीं मिल सकता। ऐसी रूहानी मस्ती का आलम मिला कि रूह आसमानों से पार हो गई।

आजादी हकीकत बन गई। रूहें पता नहीं कितने युगों से काल देश की गुलामी झेल रही थी, उनको छुटकारा मिल गया। अपने निज-देश सचखण्ड, सतलोक के बारे उनको पता चला कि वो ही हमारा असली देश है। मुर्शिद-ए-कामिल की सोहबत से ज्ञान-चक्षु खुल गए। सच-झूठ का अहसास हो गया। अलौकिक प्यार की लौ जगमगा उठी, तो परवाने उस ओर दौड़े चले आए। रूहों को ऐसा सुकून मिला कि उनके वारे-न्यारे हो गए। अपने परमपिता परमेश्वर के प्रकट स्वरूप के दर्श-दीदार पाकर हर कोई निहाल हो गया। उनके जन्म-जन्म के दु:ख-रोग मिट गए। काल चक्र से उन्हें निजात मिल गई। मोक्ष-मुक्ति के उनके लिए द्वार खुल गए।

देश आजाद हुआ, ये देशभक्ति की पराकाष्ठा है और रूहों को मोक्ष-मुक्ति का मार्ग मिला ये गुरभक्ति का सबब है। बिना गुरु गति नहीं है। पूर्ण गुरु से मिलाप होना पूर्णत: अच्छे कर्मों का सिला होता है। वो घड़ी, वो दिन मुकद्दस होता है। इसी तरह 15 अगस्त का शुभ दिन आया, जब रूहों को पूर्ण सतगुरु के दर्श-दीदार नसीब हुए। ऐसी तूफान मेल ताकत से मेल हुआ कि दो जहां संवर गए। भक्ति का सहज व सरल मार्ग मिल गया। यही नहीं, देश के प्रति भी सेवा का महान जज्बा जागृत हुआ। गुरु के पावन सानिध्य से गुरभक्ति को बल मिला और गुरभक्ति से देशभक्ति की भावना भी प्रबल हो गई। पूज्य गुरु जी का महान व्यक्तित्व देशप्रेम की झलक है। पूज्य गुरु जी की बदौलत ही आज करोड़ों अनुयायी देशसेवा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। देश-प्रेम की ऐसी मिसाल दुर्लभ है। ऐसे देश-प्रेमियों के लिए आजादी का यह महोत्सव अद्वितीय है, अतुलनीय है।

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