Relatives रिश्तेदारी में जाने से क्यों कतराते हैं बच्चे
एक समय था जब बच्चे गर्मी में स्कूल की छुट्टियाँ होते ही अपने दादी-नानी के घर जाने की जिद्द करने लगते थे, अपने भाई-बहनों के साथ खेलना, घूमना-फिरना पसंद करते थे, लेकिन आजकल के आधुनिक युग में सब रिश्ते-नाते बदल चुके हैं। आजकल अधिकतर बच्चे अपने घरों में रहना पसंद करते हैं।
पेरेंट्स के साथ यदि किसी रिश्तेदार के घर जाना हो तो तुरंत जाने से मना कर देते हैं। घर पर कोई रिश्तेदार आए तो दो पल बैठकर बात भी नहीं करते। अब तो आलम ये है कि रिश्तेदार घर पर आए होते हैं, लेकिन कुछ बच्चे अपने लैपटॉप, मोबाइल पर लगे रहते हैं।
रिश्तेदारों के सवालों से बच्चे दूर भागते हैं, क्योंकि वे पढ़ाई-लिखाई, शादी-ब्याह की बातें करते हैं। बच्चे अपने घरों में ही खुद को फ्री और सेफ समझते हैं। हालांकि, ये अच्छी आदत नहीं है। इससे बच्चा बड़ा होकर सोशलाइज़ नहीं हो पाएगा। ऐसे में पेरेंट्स को ही अपने बच्चों को समझाना चाहिए कि जिस तरह से मित्र जरूरी हैं, उसी तरह से रिश्तेदारों से भी मिलना-जुलना, बातें करना, उन्हें जानना-समझना जरूरी है। चलिए जानते हैं उन कारणों के बारे में यहाँ, जिनकी वजह से बच्चे अपने रिश्तेदारों से दूर भागते हैं।

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बच्चों का रिश्तेदारों से ना मिलने के कारण
- यदि टीनएज बच्चों की बात करें तो वे कई बार इसलिए भी किसी भी रिश्तेदार के घर नहीं जाना चाहते हैं क्योंकि उनका व्यवहार अलग तरह का ही होता है। जब भी मिलेंगे पढ़ाई कैसी हो रही है, एग्जाम में नंबर कितने आए, क्या बनना है बड़ा होकर, करियर का कुछ सोचा है या नहीं, घंटों मोबाइल चलाना ठीक नहीं आदि फलां-फलां सवालों से बच्चे खीझ उठते हैं। इसलिए भी वे किसी पर्टिकुलर रिश्तेदार के घर जाने से बचते हैं। हाँ, जहाँ उनकी पसंदीदा चीजें हों, बातें हों, जिसमें उन्हें मज़ा आए, ऐसे रिश्तेदारों के घर बच्चे जरूर जाते हैं।
- कई बार छोटी उम्र के बच्चे अपने पेरेंट्स के साथ हमेशा घर पर रहते हैं। बाहर किसी से मिलते-जुलते नहीं। ऐसे में अचानक किसी अपरिचित रिश्तेदार के घर जाकर वे डरते हैं। अनजान लोगों से जल्दी कनेक्ट नहीं हो पाते हैं। टीनएज बच्चे ये सोचते हैं कि जिन्हें जानते नहीं, उनके घर जाकर बात क्या करेंगे सिवाय बोर होने के। ऐसे में वे रिश्तेदारों के घर जाने से बचते हैं।
- कई बार किसी रिश्तेदार के साथ कोई ऐसी घटना घट जाती है, जिसका डर बच्चों के मन में हमेशा रहता है। किसी ने रिश्तेदार किसी बात को लेकर ऊँची आवाज़ में बात की हो, डांट दिया हो, थप्पड़ लगा दिया हो या फिर बच्चे को बैड टच महसूस हुआ हो तो बच्चा उस इंसान के घर दोबारा जाने से डरता है।
- बच्चों को अपनी आजादी बहुत प्यारी होती है। कुछ रिश्तेदार ऐसे होते हैं, जिनके घर पर हर चीज़ पर पाबंदी होती है। खासकर टीनएज बच्चों को सख्ती बिल्कुल पसंद नहीं आती। वे रिश्तेदारों के साथ खुलकर नहीं रह पाते हैं। खुद को उनके बीच असहज महसूस करते हैं।
पेरेंट्स करें ये काम
- बच्चे को प्यार से समझाएं कि वे भी आपके परिवार का ही हिस्सा हैं। सबको साथ में मिलकर रहना चाहिए। बच्चे से सही वजह, परेशानी को जानने की कोशिश करें।
- पॉज़िटिव तरीके से बात करें, रिश्तेदारों की गुड क्वालिटी, जरूरत, अहमियत के बारे में बच्चों को समझाएं तो ही उनके अंदर रिश्तेदारों के प्रति आत्मविश्वास, सहजता, आदर का भाव पैदा होगा। बच्चे को जबरदस्ती, डांटकर रिश्तेदारों के घर ले जाने की कोशिश न करें।
- कम उम्र से ही बच्चे को अपने साथ परिवारिक कार्यक्रम में ले जाएं, सब से मिलाप करवाएं, ताकि वे सभी को अच्छी तरह से जान-पहचान सकें।


































































