Modern irrigation

Modern irrigation: आधुनिक सिंचाई ड्रिप-स्प्रिंकलर सिस्टम

उत्तर भारत में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली आजकल खेती में बड़ी फायदेमंद साबित हो रही है। किसान इस प्रणाली को अपना दोहरा फायदा उठा सकते हैं। इस सिंचाई विधि से जहाँ पानी की बर्बादी को रोका जा सकता है, वहीं फसल उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाती है। सरकारी सब्सिडी के सहारे किसानों को इस विधि का भरपूर फायदा उठा न चाहिए। उद्यान विभाग इन प्रणालियों पर 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रहा है, जिससे किसान केवल 10 प्रतिशत खर्च पर अपने खेत को आधुनिक सिंचाई प्रणाली से जोड़ सकते हैं।

पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों में नहरों या खालों के माध्यम से पानी की 60-70 प्रतिशत तक बर्बादी हो जाती है। विशेष रूप से रेतीली मिट्टी और ढलान वाली जमीनों में यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। इसके विपरीत, ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम इस समस्या का प्रभावी और स्थायी समाधान प्रदान करते हैं। ड्रिप सिस्टम में पाइपों के जरिए पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे पानी और खाद की बर्बादी लगभग समाप्त हो जाती है।

वहीं, स्प्रिंकलर सिस्टम वर्षा की तरह खेतों में पानी का छिड़काव करता है, जो असंतुलित यानि उबड़-खाबड़ भूमि के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। सरकार का ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ अभियान भी इसी दिशा में काम कर रहा है। इससे न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि फसल की पैदावार में 30-40 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है। उदाहरण के तौर पर, पंजाब के एक किसान ने 2 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप सिस्टम लगाया। पहले ही सीजन में टमाटर की पैदावार 25 प्रतिशत बढ़ गई और पानी की खपत आधी रह गई। मजदूरी खर्च में भी कमी आई, क्योंकि खरपतवार नियंत्रण आसान हो गया। कम पानी वाले क्षेत्रों में सब्जियां, फल और बागवानी फसलों के लिए यह प्रणाली किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

लॉन्ग टर्म फायदे: खेती बनेगी अधिक लाभकारी

यह एक बार का निवेश है, लेकिन इसके फायदे लंबे समय तक मिलते हैं। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम से 50-70 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है और बिजली बिल भी काफी कम हो जाता है। मजदूरी खर्च घटता है, खरपतवार नियंत्रण आसान होता है और पैदावार में 30-40 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। साथ ही, फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

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पर्यावरण के लिए भी उपयोगी

पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी यह प्रणाली बेहद उपयोगी है। इससे भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और जल संकट की समस्या कम होती है। पंजाब में किए गए एक सर्वे के अनुसार, इन प्रणालियों को अपनाने वाले किसानों की वार्षिक आय में 2 से 3 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कम पानी वाले क्षेत्रों में मखाना, आलूबुखारा और अन्य नकदी फसलों की खेती कर किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

इसके अलावा, मेहनत कम होने से किसान शिक्षा, पशुपालन और अन्य व्यवसायों पर भी ध्यान दे पाते हैं। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में सूखा और बाढ़ जैसी परिस्थितियों से फसलों को सुरक्षित रखने में भी आधुनिक सिंचाई प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सरकारी सब्सिडी: 90 प्रतिशत तक सहायता

सबसे बड़ी राहत यह है कि उद्यान विभाग माइक्रो इरिगेशन योजना के तहत 90 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करा रहा है। छोटे किसानों, जिनके पास 2 हेक्टेयर तक भूमि है, को कई राज्यों में 95 प्रतिशत तक सहायता मिल सकती है। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में यह योजना तेजी से लागू की जा रही है। सामान्यत: 1 हेक्टेयर में ड्रिप सिस्टम लगाने की लागत लगभग 70 से 80 हजार रुपये तक आती है, जिसमें से 90 प्रतिशत राशि सरकार वहन करती है। किसान को केवल शेष 10 प्रतिशत खर्च करना पड़ता है। स्प्रिंकलर सिस्टम पर भी लगभग यही नियम लागू होते हैं।

यह सब्सिडी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है। गेहूं कटाई के बाद का समय इंस्टॉलेशन के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि अगली खरीफ फसल जैसे धान या सब्जियों की बुवाई से पहले पूरा सिस्टम तैयार हो जाता है। ये आवेदन ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर स्वीकार किए जाते हैं।

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रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया’

उद्यान विभाग ने आवेदन प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है। किसान आधिकारिक पोर्टल या राज्य उद्यान विभाग की वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। प्रक्रिया इस प्रकार है—

दस्तावेज तैयार करें:

  • आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खतौनी/जमाबंदी (7/12 या एलपीसी) और सक्रिय मोबाइल नंबर तैयार रखें।
  • पोर्टल पर लॉगिन करें: एनएफएसएम या पीएमकेएसवाई पोर्टल (स्रे‘२८.ल्ल्रू.्रल्ल) अथवा राज्य पोर्टल पर ‘नई माइक्रो इरिगेशन योजना’ विकल्प चुनें।
  • आवेदन भरें: खेत का विवरण, क्षेत्रफल और सिस्टम का प्रकार (ड्रिप या स्प्रिंकलर) दर्ज करें।
  • दस्तावेज अपलोड करें: मोबाइल या सीएससी सेंटर के माध्यम से आवेदन सबमिट करें। इसके बाद फील्ड अधिकारी सत्यापन के लिए आएंगे।
  • स्वीकृति प्राप्त करें: करीब 15 से 30 दिनों में सब्सिडी स्वीकृत हो जाती है और इंस्टॉलेशन के बाद राशि सीधे खाते में भेज दी जाती है।

सीएससी सेंटरों पर किसानों की सहायता के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध है। आवेदन करते समय ध्यान रखें कि सही बैंक विवरण और सक्रिय मोबाइल नंबर अवश्य दें।

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