Chandpura: शहीदों और वीरों का गाँव ‘चांदपुरा’

  • 12 डेरा प्रेमियों ने मरणोपरांत किया शरीरदान
  • गाँव के गौरव पट्ट गा रहे डेरा प्रेमियों के अनूठे बलिदान की गाथा

“मंजिल तो तेरी यहीं थी, इतनी देर लगा दी आते-आते, क्या मिला तुझे जिंदगी से, अपनों ने ही जला दिया जाते-जाते।” अक्सर शमशान घाटों के मुख्य द्वार पर लिखे ये चेतावनी भरे शब्द इंसान को जीवन की नश्वरता का अहसास कराते हैं। अधिकांश लोग जीवन की अंतिम यात्रा को केवल अंतिम संस्कार तक ही सीमित मानते हैं।

इसके विपरीत, जाखल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गाँव चांदपुरा के ग्रामीणों ने इस सोच से परे जाकर मानवता की एक ऐसी अनूठी और अनुकरणीय मिसाल पेश की है, जिसने न केवल क्षेत्र का नाम रोशन किया है, बल्कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भी एक बहुत बड़ा योगदान दिया है। गाँव चांदपुरा के डेरा सच्चा सौदा से जुड़े श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए जीते जी तो अपना हर लम्हा इंसानियत और समाज सेवा के कार्यों में समर्पित करते ही है, साथ ही अपनी मृत्यु के बाद भी दूसरों के जीवन में काम आ रहे हैं।

इस छोटे से गाँव से 2013 से अब तक मरणोपरांत रिकॉर्ड 12 डेरा प्रेमियों का शरीरदान हो चुका है। इन दानवीरों के पार्थिव शरीर आज विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में रिसर्च करने वाले छात्र-छात्राओं को एक कुशल और योग्य डॉक्टर बनने के लिए प्रैक्टिकल शिक्षा हासिल करने में मदद कर रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, एक मेडिकल छात्र को मानव शरीर की संरचना को बारीकी से समझने के लिए एक मानव देह की अत्यंत आवश्यकता होती है। चांदपुरा गाँव के इन 12 परिवारों ने अंधविश्वासों को पीछे छोड़ते हुए समाज को एक नई दिशा दिखाई है। आज पूरा क्षेत्र इन दानवीर आत्माओं और उनके साहसी परिवारों को सलाम कर रहा है।2 1

देहदान के साथ-साथ नेत्रदान और रक्तदान में भी अग्रणी:

चांदपुरा गाँव के श्रद्धालुओं का सेवा भाव केवल शरीरदान तक ही सीमित नहीं है। अंधत्व निवारण अभियान के तहत इस गाँव से अब तक 2 लोगों का मरणोपरांत नेत्रदान भी सफलतापूर्वक हो चुका है, जिससे अंधेरी जिंदगियों में उजाला हुआ है। नेत्रदान करने वालों में संसार सिंह इन्सां पुत्र श्री दलीप सिंह व माता अमरजीत कौर पत्नी जरनैल सिंह शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इस गाँव के युवाओं और श्रद्धालुओं ने समय-समय पर सैकड़ों यूनिट रक्तदान कर आपातकाल और विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे अनगिनत जरूरतमंद मरीजों की जान बचाने में सक्रिय भूमिका निभाई है।

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सैन्य योगदान और स्वतंत्रता सेनानी

चांदपुरा एक ऐतिहासिक और प्राचीन गाँव है, जिसने भारतीय सेना को कई जांबाज सिपाही दिए हैं। इस गाँव के कई सैनिकों को देश की रक्षा के लिए ‘वीरता पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं स्वतंत्रता सेनानियों की सूची में भी इस गाँव का नाम गौरव के साथ दर्ज़ है। इस गाँव के शहीद लांस नायक राय सिंह हरी को स्वत्रंता सेनानी होने का मान हासिल है, जिन्हें शौर्य वीर चक्र से विभूषित किया गया था। ये महान योद्धा देश के लिए 7 नवंबर 1947 को कबालियों के विरूद्व कश्मीर में पहली सिख रेजीमैंट बटालियन की अगुवाई करते हुए श्रीनगर बारामूला में शहीद हो गए थे।

महान दानवीरों का विवरण

दानवीर शरीरदान की तिथि
गुरनामों इन्सां 4 मई 2013
अमरजीत कौर इन्सां 20 मई 2013
चेतु सिंह इन्सां 2 मई 2014
बीरबल सिंह इन्सां 3 मई 2014
भाग सिंह इन्सां 4 जून 2014
दर्शन सिंह इन्सां 14 अक्टूबर 2018
नाजर सिंह इन्सां 16 अक्टूबर 2018
नेक सिंह इन्सां 26 अगस्त 2019
अंग्रेज कौर इन्सां 26 सितंबर 2019
बलवीर सिंह इन्सां 24 जून 2021
छोटादास इन्सां 1 जुलाई 2022
चंद सिंह इन्सां 2 सितंबर 2022

‘गौरव पट्ट’ पर अंकित हैं दानवीरों के नाम

चांदपुरा गाँव से हुए इन शरीर दानियों की सूची को पूरे सम्मान के साथ गाँव के ‘गौरव पट्ट’ पर अंकित किया गया है। यह गौरव अब आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। क्षेत्र के लोग इन परिवारों की भूरी-भूरी प्रशंसा कर रहे हैं, जो रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़कर, अपने पूर्ण सतगुरु के दिखाए मार्ग पर चलते हुए समाज सुधार की अनेक मुहिमों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।

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हमारे गाँव चांदपुरा के इन परिवारों ने जो हौसला और सेवा भावना दिखाई है, वह पूरे समाज के लिए मार्गदर्शक है। मृत्यु के बाद शरीर को पंचतत्व में विलीन होना ही होता है, लेकिन उसे चिकित्सा अनुसंधान के लिए दान देकर इन परिवारों ने कई युवाओं के डॉक्टर बनने का रास्ता साफ किया है। पूरे गाँव को अपने इन दानवीरों और उनके परिवारों पर नाज़ है। ग्राम पंचायत इन सभी महान आत्माओं को नमन करती है।
-अमरीक सिंह ग्रेवाल, सरपंच गाँव चांदपुरा।

चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई में थ्योरी से कहीं ज्यादा प्रैक्टिकल ज्ञान की जरूरत होती है। एक बेहतरीन सर्जन या फिज़िशियन बनने के लिए मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की आंतरिक संरचना को गहराई से समझना पड़ता है। आज के समय में मेडिकल कॉलेजों में रिसर्च के लिए मानव शरीरों की भारी कमी रहती है। ऐसे में चांदपुरा के ग्रामीणों द्वारा किया गया यह प्रयास आने वाले समय में सैकड़ों कुशल डॉक्टर तैयार करने में संजीवनी का काम करेगा। यह अंधविश्वास के खिलाफ एक बड़ी जीत है।
-डॉ. राजेश क्रांति, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ)।

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