Office: ऑफिस में एंग्जायटी से बचकर रहें
आॅफिस, कार्य स्थल ऐसी जगह है जहां हर कोई अपनी तरक्की चाहता है। इसके लिए आॅफिस स्टाफ लगातार अपनी कार्यक्षमता को बढ़ाने और अधिक कार्य करने की वजह से एंग्जायटी यानि चिंता व तनाव का शिकार हो जाता है। ऐसे में जब कोई नया विचार दिमाग में आता है, तो यह भी डर साथ में होता है
कि कहीं कुछ गलत न हो जाए। जब बातचीत या स्थिति स्पष्ट न हो, तो नकारात्मक सोच दिमाग में घर कर जाती है। इसलिए ऐसी स्थिति से बचने के लिए जरूरत होती है अपनी सोच को बदलने की। दरअसल एंग्जायटी काम के दौरान समस्याएं पैदा करती है। अगर स्थिति लगातार बनी रहती है तब इससे व्यक्ति की रोज़ाना की दिनचर्या भी प्रभावित हो सकती है।
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तो आइए जानते है ऐसी स्थिति से बचने के कुछ उपाय:
अपने-आपको हमेशा बेहतर समझें:
एंग्जायटी से जूझ रहे लोग अक्सर सोचते हैं कि दूसरे लोग उन्हें पसंद नहीं करते या उन्हें कम प्रतिभाशाली मानते हैं। बेहतर होगा अगर आप अपनी शक्तियां खुद पहचानें। जिस काम में आप अच्छे हैं, वह करें और अपना आत्मविश्वास बढ़ाएं।
फीडबैक को लेकर रक्षात्मक होना:
जब भी कोई काम किया जाता है, तो लोगों द्वारा उसके बारे में अच्छी व बुरी दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं ही सामने आती हैं। आलोचना को खुले मन से स्वीकार करें। कोई फीडबैक असहज करे, तो कहें कि ये अच्छे पॉइंट्स हैं, मैं इस पर थोड़ा सोचकर जवाब दूंगा।
बेवजह का डर:
एंग्जायटी से ग्रस्त लोग उन चीज़ों से बचने लगते हैं, जिनसे उन्हें घबराहट होती है और बाद में शर्मिंदगी महसूस करते हैं। जैसे किसी ईमेल का जवाब टालना, जिससे दूसरों को आप गैर-जिम्मेदार लग सकते हैं। चीजों से बचने की बजाय अपने ज्ञान के स्तर को बढ़ाएं और अपने डर का सामना करें।
नए विचारों पर प्रतिक्रिया:
किसी नए आइडिया पर आपकी पहली प्रतिक्रिया सिर्फ उसके जोखिम और कमियों के बारे में सोचने की होती है, तो लोग इसे नकारात्मक रवैया समझते हैं। पहले नए विचार की अच्छी बातें पहचानें। उसके बाद ही अपनी चिंताएं रखें। बातचीत को सकारात्मक रखें।
एंग्जायटी से बचने के अन्य उपाय:
- दिन की शुरूआत जिस तरह से होती है, उसका प्रभाव पूरे दिन रहता है। सुबह के समय आपके मूड और मानसिक स्थिति जिस तरह से होगी, उसका असर पूरे दिन दिखेगा। सुबह के समय शांत रहने के लिए आप मोबाइल देखने, ईमेल चेक करने या काम के बारे में बार-बार सोचने से बचें। डॉक्टर बताते हैं कि सुबह के समय आप कुछ मिनट ध्यान, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज, योग व पार्क में वॉक कर सकते हैं। इससे आपका दिमाग शांत होता है।
- ज्यादातर, समय अकेले बिताने वाले लोगों में मायूसी और उदासी ज्यादा देखने को मिलती है। ऐसे में अपनी सोशल एंगेजमेंट बढ़ाने की कोशिश करें। दोस्तों के साथ समय बिताएं। इससे मेंटल हेल्थ बूस्ट होगी और आप फ्रेंडली नेचर के होंगे।
- आॅफिस में कई बार प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए एक साथ कई काम करने पड़ते है। ऐसे में माइंड तेजी से थक सकता है। साथ ही मेंटल स्ट्रेंथ पर भी दबाव पड़ता है। यह भी तनाव और एंग्जायटी को ट्रिगर कर सकता है। इससे बचने के लिए आप एक समय पर एक ही काम करें। इससे फोकस करने में मदद मिलती है।
- आॅफिस में घंटों स्क्रीन पर देखने और काम करने से बचें। घंटों तक एक ही जगह पर बैठने से फिज़िकल और मेंटल दोनों ही हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। इस आदत को बदलने के लिए आप आॅफिस में हर 20 से 30 मिनट के बीच हल्की वॉक करें या शॉर्ट वॉक करें।
- रात में 8-10 घंटे की नींद दिमाग को रिलैक्स रखने में मदद करती है। इसलिए नींद से समझौता न करें। सोने से कुछ देर पहले फोन दूर रख दें। इससे स्लीप पैटर्न सही होगा और स्ट्रेस-एंग्जाइटी की समस्या दूर होगी। -डेस्क

































































