वेलेंटाइन डे (ट्रयू लव डे)

वेलेंटाइन डे (ट्रयू लव डे) : अव्वल है गुरु की प्रीत, तुम्हीं से है जहां मेरा… true-love-day

वेलेंटाइन डे बेशक एक विदेशी आयतित त्यौहार है, लेकिन पश्चिमी देशों से आज पूरी दुनिया में फैल चुका है। इस त्यौहार को प्यार के इजहार के तौर पर मनाया जाता है और प्यार किसी भाषा के मक्कड़जाल में कैद होने वाली चीज नहीं है। अर्थात् इसका कोई विशेष सम्प्रदाय या जाति-वर्ग नहीं है।

प्यार सच्चा होता है। प्यार से प्यार की भावना को बल मिलता है, और नफरत से नफरत की भावना बढ़ती है। तो क्यों न जिंदगी को प्यार से जीया जाए!

यह त्यौहार प्यार को समर्पित है। यही कारण है कि आज पूरी दुनिया में इस त्यौहार का जादू देखने को मिल रहा है। भारत देश में तो प्यार की रीत युगों पुरानी है।

पूरे विश्व को प्रेम-प्यार व शांति का संदेश इसी देश से मिला है। फिर भला प्यार का संदेश देने वाले इस ‘वेलेंटाइन डे’ को कैसे अनदेखा किया जा सकता है।

जिस तरह हम क्रिसमस डे, गुड-फ्राइडे मनाते हैं, जोकि विदेशी त्यौहार हैं, उसी तरह से वेलेंटाइन मनाने में भी कोई बुराई नहीं है। लेकिन आज के कथित संकीर्ण सोच वाले युवाओं ने इसे विकृत बना दिया है और इसीलिए ज्यादातर भारतीय इसका विरोध भी करते देखे जाते हैं। कहने का तात्पर्य कि दिन, त्यौहार या सस्ंकृति कोई बुरी नहीं, …बस इसके मनाने के तरीके में जो असभ्यता व अशालीनता आ गई है, इसलिए लोगों के मन में घृणा देखी जाती है।

जरा सोचिए, हम हिंदुस्तानी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च इत्यादि किसी भी धार्मिक स्थल के सामने से गुजरते हैं, तो हमारा शीश श्रद्धापूर्वक अपने-आप ही झुक जाता है। कोई संत हो या फकीर या फादर, हम उन्हें आदर की दृष्टि से देखते हैं। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि हमारे पूर्वजों (बुजुर्गों) ने हमें दूसरों का सम्मान, आदर करना सिखाया है।

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यही कारण है कि हम दूसरों की संस्कृति को भी बहुत जल्द आत्मसात कर लेते हैं। आखिर यह हमारे स्वभाव में जो है। हमारी सोच हमेशा सकारात्मक रही है। इसलिए हम भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के सारे देशों, उनकी रीति-रिवाजों व उनकी संस्कृति का सम्मान करते हैं, उन्हें मानते हैं।

अगर कोई वास्तव में त्यौहार मनाने का सही तरीका सीखना चाहता है, तो डेरा सच्चा सौदा का अनुसरण करें। यहां पर हर त्यौहार को उसके असली महत्व से जोड़कर ही मनाया जाता है। वेलेंटाइन डे को पूज्य गुरु संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने ‘ट्रयू लव डे’ का नाम दिया है, क्योंकि यह दिन वास्तव में सच्चे प्रेम का दिन है।

इस दिन यहां के श्रद्धालु जिनमें बुजुर्ग, युवा व बच्चे आदि सभी वर्गों के लोग शामिल होते हैं तथा यहां के स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थी अपने सतगुरु, मुर्शिद, पापा कोच को बड़े-बड़े पोस्टरों पर अपने प्रेम के संदेश को लिखकर शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं। वहीं पूज्य गुरु जी अपने प्यारे बच्चों को पावन आशीर्वाद देकर ‘ट्रयू लव डे’ की बधाई देते हैं और इस दिन को मालिक से सच्चे प्रेम के रूप में मनाने की प्रेरणा देते हैं।

वैसे भी धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो हमारी आत्मा, उस परमपिता परमात्मा की ही अंश है। तमाम शरीर में बसी आत्मा, जब अपने सतगुरु-मालिक से अपने नि:स्वार्थ प्रेम को दर्शाती है, तब वो प्रेम अव्वल दर्जे का मंजूर किया जाता है। संत, महापुरुष हमेशा से हर किसी के मालिक के प्रति होने वाले प्रेम को ही सर्वोच्च-प्रेम मानते आए हैं।

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तभी तो हमारे संत- महापुरुष इतने महान हुए हैं कि आज भी हम उनका नाम श्रद्धा से लेते हैं व उन्हें स्मरण करते हैं। संत-महात्मा हमें हमेशा सच्चे प्रेम का पाठ पढ़ाते हैं।

इस त्यौहार की यही वास्तविकता है कि इसे आत्मा व परमात्मा के प्रेम के साथ जोड़कर मनाया जाना चाहिए। यही इस दिन की वास्तविकता है।
– एसएस डेस्क

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